बिहार में अब नहीं बनेंगी लाल ईंटों से सरकारी इमारतें, हाईकोर्ट ने फ्लाई ऐश ईंटों का इस्तेमाल किया अनिवार्य

पटना हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बिहार में सरकारी ढांचागत परियोजनाओं में लाल ईंटों (Red Bricks) के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

बिहार में अब नहीं बनेंगी लाल ईंटों से सरकारी इमारतें, हाईकोर

Patna - पटना हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की ढांचागत परियोजनाओं में लाल ईंटों के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जस्टिस संदीप कुमार की पीठ ने ब्रिक्स फर्म द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त निर्देश जारी किया। 

सरकारी निर्माण में लाल ईंटों पर तत्काल रोक

पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि बिहार सरकार की किसी भी ढांचागत परियोजना में अब लाल ईंटों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने पर्यावरण नियमों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भविष्य में विशेष रूप से स्कूल भवनों के निर्माण में केवल पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों का ही उपयोग होना चाहिए। 

फ्लाई ऐश ईंटों का 100% उपयोग अनिवार्य

कोर्ट ने केंद्र सरकार के 31 दिसंबर, 2021 के निर्देशों का हवाला देते हुए अधिकारियों को इसे सख्ती से लागू करने को कहा है। आदेश के अनुसार, थर्मल पावर प्लांट के 300 किलोमीटर के दायरे में होने वाले सभी बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में फ्लाई ऐश (Fly Ash) ईंटों का शत-प्रतिशत उपयोग अनिवार्य है। कोर्ट ने हैरानी जताई कि नियमों के बावजूद अब तक लाल ईंटों का प्रयोग कैसे होता रहा। 

पश्चिम चम्पारण के आवासीय स्कूल पर विशेष निर्देश

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से पश्चिम चम्पारण के जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि जोगापट्टी स्थित चिमनिया बाजार में निर्माणाधीन 560 बेड वाले आवासीय स्कूल के प्रोजेक्ट में लाल ईंटों का प्रयोग तुरंत बंद कराया जाए। कोर्ट ने बिहार शैक्षणिक ढांचागत विकास निगम लिमिटेड से इस उल्लंघन पर जवाब भी मांगा है। 

पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर कोर्ट की सख्ती

जस्टिस संदीप कुमार ने टिप्पणी की कि सरकारी परियोजनाओं में फ्लाई ऐश ईंटों की जगह लाल ईंटों का उपयोग पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सभी ढांचागत परियोजनाओं में पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय के मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। 

अगली सुनवाई और भविष्य की रूपरेखा

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गिरिजेश कुमार ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वे अपने मुवक्किल को नियमों के अनुसार ही भवन निर्माण करने की सलाह देंगे। अदालत अब इस मामले की अगली प्रगति की समीक्षा 17 फरवरी, 2026 को होने वाली पुनः सुनवाई में करेगी।