Bihar News : 'आत्मसमर्पण जमानत देने का आधार नहीं', पटना हाईकोर्ट ने निरस्त की POCSO आरोपियों की बेल, 2 सप्ताह में सरेंडर का दिया आदेश

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने खगड़िया के एक चर्चित पॉक्सो (POCSO) मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए चार आरोपितों को निचली अदालत से मिली नियमित जमानत को रद्द कर दिया है.....पढ़िए आगे

Bihar News : 'आत्मसमर्पण जमानत देने का आधार नहीं', पटना हाईक
पटना हाईकोर्ट का फैसला - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने खगड़िया के पॉक्सो मामले में आरोपित चार लोगों को दी गयी नियमित जमानत रद्द कर दी है। जस्टिस संदीप कुमार ने खगड़िया निवासी रामपुकार साहनी समेत चार आरोपितों की जमानत रद करते हुए कहा कि विशेष अदालत ने चार दिन पहले उन्हीं आरोपितों की अग्रिम जमानत खारिज की थी, लेकिन उसी सामग्री के आधार पर 19 जुलाई 2025 को आत्मसमर्पण के दिन ही नियमित जमानत दे दी। इस दौरान पीड़िता की मां और मामले की सूचक को न तो नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर मिला। हाईकोर्ट ने जमानत आदेश को शुरू से ही कानूनी खामी से ग्रस्त माना।

ये मामला खगड़िया महिला थाना से जुड़ा है. अभियोजन के अनुसार, 2 मार्च 2025 को पांच आरोपित 14 वर्षीय नाबालिग के कमरे में घुसे और उस पर यौन अपराध करने का प्रयास किया। विरोध करने पर बच्ची और उसकी मां के साथ मारपीट की गयी।  15 जुलाई, 2025 को विशेष न्यायाधीश ने अग्रिम जमानत खारिज करते हुए केस डायरी में पीड़िता और गवाहों के बयान को अभियोजन के समर्थन में पाया था। चोट की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर थी और आरोपितों के विरुद्ध विशिष्ट आरोप दर्ज थे।

चार दिन बाद आरोपितों ने आत्मसमर्पण किया और उसी दिन नियमित जमानत मिल गयी। हाईकोर्ट ने कहा कि आत्मसमर्पण नियमित जमानत सुनने की शर्त है, जमानत देने के पक्ष में नई परिस्थिति नहीं। अभियोजक की सहमति अदालत को केस डायरी की सामग्री पर स्वतंत्र न्यायिक विचार से मुक्त नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने माना कि विशेष न्यायाधीश ने वस्तुतः अपने चार दिन पुराने आदेश की समीक्षा कर उसे पलट दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि जमानत के स्तर पर यह निष्कर्ष देना कि पॉक्सो के तहत आरोप नहीं बनता, बेल कोर्ट की वैध सीमा से आगे जाना है।

कोर्ट ने कहा कि चोट साधारण होने का धारा 8 के आरोप पर निर्णायक असर नहीं है, क्योंकि शारीरिक चोट इस अपराध का आवश्यक तत्व नहीं है। हाईकोर्ट ने चारों की जमानत रद कर दो सप्ताह में आत्मसमर्पण का निर्देश दिया। उन्हें नयी जमानत अर्जी दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गयी है। ऐसी अर्जी पर पीड़िता की मां को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर देना होगा।  कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश को पॉक्सो के संवेदनशील मामलों में भविष्य में अधिक सतर्क रहने को कहा।