Patna High Court: डिजिटल दौर में नेट का इंतजार! पटना हाईकोर्ट में तेज इंटरनेट और वाई-फाई की मांग को लेकर दायर हुई जनहित याचिका
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट में सुस्त इंटरनेट और वाई-फाई की कमी के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है। 16 मार्च को इस मामले में सुनवाई होनी है। अधिवक्ताओं ने स्लो इंटरनेट को लेकर याचिका दायर की है।
Patna High Court: पटना हाइकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी है,जिसमें पटना हाईकोर्ट के परिसर और कोर्ट रूम में समयबद्ध तरीके से उच्च गति की इंटरनेट कनेक्टिविटी, जिसमें वाई-फाई सुविधा भी शामिल हो, उपलब्ध करवाया जाए।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका की सुनवाई की तिथि 16 मार्च 2026 को निर्धारित की है।
अधिवक्ता ने दायर की याचिका
ये जनहित याचिका अधिवक्ता ओम प्रकाश की ओर दायर की गयी है।अधिवक्ता ओम प्रकाश ने अपनी जनहित याचिका में ये मांग की है कि पटना हाईकोर्ट के परिसर के भीतर इंटरनेट और वाई-फाई सुविधाओं के नियमित रखरखाव, सुरक्षा और निर्बाध संचालन के लिए एक व्यापक और प्रभावी नीति तैयार किया जाए। इससे डिजिटल न्यायिक सेवाओं का प्रभाव सुनिश्चित हो सके औऱ भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन ना हो सके।
पटना हाईकोर्ट में इंटरनेट की किल्लत!
उन्होंने अपने जनहित याचिका में ये कहा है कि पटना हाईकोर्ट ने ई-कोर्ट प्रणाली, वर्चुअल हाइब्रिड सुनवाई, ऑनलाइन कॉज लिस्ट, डिजिटल केस प्रबंधन प्रणाली और ई-फाइलिंग जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाया है। पटना हाईकोर्ट में उपलब्ध इंटरनेट अत्यंत अपर्याप्त है और हाईकोर्ट के कोर्ट रूम, गलियारों और परिसर में तो यह लगभग न के बराबर है।
कार्य में आती है रुकावट
इसके परिणामस्वरूप ई-फाइलिंग पोर्टल, वर्चुअल सुनवाई प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन केस लिस्ट और डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंच में बार-बार व्यवधान उत्पन्न होता है। इससे वादियों, अधिवक्ताओं और अन्य सभी हितधारकों के लिए न्याय के सुचारू, कुशल और समयबद्ध प्रशासन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
16 मार्च को होगी सुनवाई
अधिवक्ता ओम प्रकाश ने अपने जनहित याचिका में ये कहा है कि बिहार सरकार एवं हइकोर्ट के महानिबंधक भी मौजूदा परिस्थितियों और कोर्ट परिसर में अपर्याप्त और कई कोर्ट में इंटरनेट कनेक्टिविटी के न होने से उत्पन्न गंभीर परिणामों से पूरी तरह अवगत हैं। फिर भी अधिकारियों की निरंतर निष्क्रियता और उदासीनता के कारण वकीलों द्वारा झेली जा रही लगातार कठिनाइयों और परेशानियों को जानबूझकर अनदेखा किया है।इससे अदालतों के कामकाज में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है।