दीघा रेप कांड: हाई कोर्ट का सख्त रुख, सजायाफ्ता जितेंद्र की 'आजादी' वाली अर्जी को किया रद्द

पटना हाई कोर्ट ने 15 वर्षीय नाबालिग से नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म करने वाले दोषी जितेंद्र कुमार उर्फ कुनकुन की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने निचली अदालत के चार साल के कारावास के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया।

दीघा रेप कांड: हाई कोर्ट का सख्त रुख, सजायाफ्ता जितेंद्र की
नाबालिग से रेप के आरोपी को मिली सजा।- फोटो : gemini

Patna - पटना हाई कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और अपहरण के मामले में सजायाफ्ता जितेंद्र कुमार उर्फ कुनकुन को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की पीठ ने दोषी द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि दोषी ने पीड़िता को नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ गलत काम किया था।

यह मामला जनवरी 2022 का है, जब पीड़िता की मां ने दीघा थाना (कांड संख्या 39/2022) में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उनकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी कोचिंग के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। जांच में पता चला कि जितेंद्र कुमार उसे अपने साथ ले गया था। पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं और पोस्को कानून के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।

निचली अदालत (अपर सत्र न्यायाधीश-छह सह विशेष न्यायाधीश पोस्को) ने पिछले साल 20 जनवरी को जितेंद्र को दोषी करार दिया था। इसके बाद 24 जनवरी को उसे आईपीसी की धारा 363 के तहत चार साल के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। जुर्माना न भरने पर दो माह की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा का भी प्रावधान किया गया था।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दोषी ने नाबालिग पीड़िता को चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स दिया था। कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाने के बाद उसने पीड़िता को गलत काम करने के लिए मजबूर किया। ट्रायल कोर्ट ने इन साक्ष्यों के आधार पर उसे आईपीसी की धारा 363, 366(ए), 366 और पोस्को कानून की धारा 12 के तहत आरोपी माना था।

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को पूरी तरह से निराधार पाते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।