पटना हाई कोर्ट का बड़ा प्रहार: बेगूसराय 'रिंकू हत्याकांड' की अब विकास वैभव करेंगे जांच, पुलिस की थ्योरी खारिज

पटना हाई कोर्ट ने बेगूसराय के रिंकू कुमारी हत्याकांड की जांच आईजी विकास वैभव को सौंपी है। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था, लेकिन कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए पुनः अनुसंधान का आदेश दिया।

पटना हाई कोर्ट का बड़ा प्रहार: बेगूसराय 'रिंकू हत्याकांड' की

Patna - : पटना हाई कोर्ट ने बेगूसराय जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पांच साल पहले हुई रिंकू कुमारी की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिसिया जांच को पूरी तरह सिरे से नकार दिया है। जस्टिस संदीप कुमार ने स्थानीय पुलिस के ढुलमुल रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए आदेश दिया कि इस पूरे मामले का अब 'पुनः अनुसंधान' (Re-investigation) किया जाएगा। कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान बिहार पुलिस के तेजतर्रार महानिरीक्षक (IG) विकास वैभव के हाथों में सौंप दी है।

पुलिस ने हत्या को बताया आत्महत्या, कोर्ट ने पकड़ी 'गड़बड़ी'

अदालत ने तेजस्विनी कुमारी की आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि स्थानीय पुलिस ने अनुसंधान की दिशा ही बदल दी थी। जहाँ परिजनों ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया था, वहीं पुलिस ने बिना पुख्ता आधार के इसे आत्महत्या बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट (फाइनल फॉर्म) कोर्ट में दाखिल कर दी थी। जस्टिस संदीप कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि "सही और निष्पक्ष अनुसंधान, निष्पक्ष मुकदमा चलाने के मौलिक अधिकार का एक अभिन्न अंग है," और स्थानीय पुलिस की जांच में भारी अनियमितताएं पाई गईं।

15 लाख का विवाद और संदिग्ध मौत का कनेक्शन

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में सनसनीखेज खुलासा किया कि मृतिका रिंकू कुमारी ने अपने पड़ोस के दो लोगों को जमीन खरीदने के लिए 15 लाख रुपये एडवांस दिए थे। रकम हड़पने की नीयत से जब आरोपियों ने आनाकानी की, तो पंचायत के दबाव में उन्होंने 4 अप्रैल 2021 को पैसे लौटाने का वादा किया था। रिंकू उसी दिन सुबह स्कूल के लिए निकली थीं, लेकिन दोपहर में उनका शव स्कूल परिसर में संदिग्ध अवस्था में मिला।

शव की स्थिति ने खोली पुलिसिया दावों की पोल

मृतिका का शव जिस हालत में मिला, वह आत्महत्या की कहानी पर बड़े सवाल खड़े करता था। शव पर धूल-मिट्टी सनी हुई थी और गर्दन में फांसी का फंदा अटका हुआ था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत से ही प्रभावशाली पड़ोसियों को प्राथमिकी में नामजद करने से इनकार कर दिया था। पुलिस का तर्क था कि सबूत मिलने पर नाम जोड़ेंगे, लेकिन बाद में पूरे मामले को ही ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई।

IG विकास वैभव की टीम करेगी 'दूध का दूध और पानी का पानी'

हाई कोर्ट ने अब बेगूसराय पुलिस से यह केस छीनकर आईजी विकास वैभव के अधीन एक विशेष अनुसंधान टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट को उम्मीद है कि विकास वैभव के नेतृत्व में इस जटिल गुत्थी को सुलझाया जा सकेगा और पीड़िता की बेटी तेजस्विनी को न्याय मिल सकेगा। इस आदेश के बाद बेगूसराय पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि अब पूर्व की जांच करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली भी रडार पर आ सकती है।

निष्पक्ष न्याय की उम्मीद में पांच साल का लंबा इंतजार

यह मामला न केवल एक महिला की संदिग्ध मौत का है, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवालिया निशान है। पांच साल तक न्याय के लिए भटक रही बेटी तेजस्विनी कुमारी के लिए हाई कोर्ट का यह फैसला एक नई किरण लेकर आया है। अब देखना यह होगा कि विकास वैभव की टीम उन कड़ियों को कैसे जोड़ती है जिन्हें स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया था।