भ्रष्टाचारियों की ढाल बना बिहार सूचना आयोग? RTI के 28,000 अपीलों का 'डेथ वारंट' लेकर पटना हाईकोर्ट पहुंचे अधिवक्ता

बिहार में सूचना के अधिकार (RTI) कानून की गिरती स्थिति को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। अधिवक्ता प्रवीण कुमार द्वारा दायर इस याचिका में राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

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Patna - बिहार में सूचना के अधिकार के तहत कानून को बचाने सक्रिय करने के लिए पटना हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की गयी है।ये जनहित याचिका अधिवक्ता प्रवीण कुमार ने दायर की है।उन्होंने अपनी जनहित याचिका में बताया कि  राज्य सूचना आयोग में 28,000 से अधिक मामलें  लंबित है। बिहार राज्य सूचना आयोग  इन में सूचना के अधिकार  के तहत द्वितीय अपीलों की बड़ी संख्या लंबित है।इस व्यवस्था के चरमराने के कारण ये जनहित याचिका दायर की गयी है।

यह याचिका बिहार के आम नागरिकों के अधिकारों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।     इस जनहित याचिका में राज्य सूचना आयोग के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जो यह साबित करते हैं कि दिसंबर ,2024 तक आयोग में 28,291 द्वितीय अपीलें  लंबित हैं।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता प्रवीण कुमार ने हाईकोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा है कि जहाँ सूचना के अधिकार के कानून के तहत प्रथम अपील के लिए 45 दिनों की वैधानिक समय-सीमा तय है, वहीं द्वितीय अपील के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित न होने के कारण व्यवस्था पूरी तरह से पंगु हो चुकी है।सूचना आयोग की इस भारी लेटलतीफी के कारण बिहार में सूचना का अधिकार कानून व्यावहारिक रूप से एक 'मृत पत्र'  बन कर रह गया है।

इस  याचिका के माध्यम से माननीय हाईकोर्ट से यह मांग की गई है कि द्वितीय अपीलों के निपटारे के लिए एक सख्त न्यायिक समय-सीमा  तय की जाए। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही तय हो ,ताकि आम जनता के सूचना जानने के मौलिक अधिकार' का हनन न हो।

इस जनहित याचिका में माननीय हाईकोर्ट से सतत परमादेश भी जारी करने की विशेष अनुरोध किया गया है। तात्पर्य ये है हाईकोर्ट केवल एक बार आदेश देकर मामले को खत्म न करे, बल्कि समय-समय पर राज्य सूचना आयोग से रिपोर्ट मांगकर इस पूरी प्रक्रिया की खुद निगरानी करे।

जब तक कि 28 हजार से अधिक अपीलों का यह भारी बैकलॉग खत्म न हो जाए।इस जनहित याचिका के निर्णय से बिहार के उन हजारों आम नागरिकों को सीधी राहत मिलेगी, जो सालों से आयोग में अपनी अपीलों की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।