IIT पटना का 'तुगलकी फरमान' हाई कोर्ट ने किया रद्द: स्कूल का ताला खोलने का आदेश, 800 बच्चों की जीत!
पटना हाईकोर्ट ने आइआइटी पटना स्थित फाउंडेशन एकेडमी को बंद करने के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने आइआइटी को स्कूल का ताला खोलने और 1 अप्रैल से नया सत्र शुरू होने देने का आदेश दिया है।
Patna - : आइआइटी पटना परिसर में संचालित फाउंडेशन एकेडमी को बंद करने की आइआइटी प्रशासन की 'मनमानी' पर पटना हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए रोक लगा दी है। जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने न केवल स्कूल हटाने के आदेश पर स्टे लगाया, बल्कि आइआइटी प्रशासन को स्कूल का ताला तुरंत खोलने का भी आदेश दिया है। इस फैसले से स्कूल में पढ़ रहे करीब 800 बच्चों और उनके अभिभावकों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
IIT की 'जबरदस्ती' पर कोर्ट सख्त: 1 अप्रैल से शुरू होगा नया सत्र
अदालत ने आइआइटी प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न की जाए। विवश्वान एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आइआइटी को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट के इस आदेश ने आइआइटी के उस फरमान को ठंडे बस्ते में डाल दिया है, जिसमें रातों-रात स्कूल खाली करने को कहा गया था।
800 बच्चों का भविष्य दांव पर: एयरफोर्स और NDRF के बच्चे भी प्रभावित
वरीय अधिवक्ता राजीव सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस एकेडमी में नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई होती है। यहाँ न केवल आइआइटी कर्मियों के बच्चे, बल्कि एयर फोर्स, एनडीआरएफ के जवानों और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। आइआइटी का अचानक स्कूल बंद करने का फैसला इन मासूमों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
वादाखिलाफी का आरोप: 2028 तक मिली थी अनुमति, फिर 2026 में ही क्यों निकाला?
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि आइआइटी के रजिस्ट्रार ने खुद 21 मार्च 2021 को पत्र लिखकर शैक्षणिक सत्र 2027-28 तक स्कूल चलाने की लिखित अनुमति दी थी। इसके बावजूद 19 मार्च 2026 को अचानक एक पत्र जारी कर 30 मार्च तक परिसर खाली करने का 'तुगलकी फरमान' सुना दिया गया। अधिवक्ता ने इसे पूरी तरह गैरकानूनी और जबरदस्ती की कार्रवाई करार दिया है।
अगली सुनवाई 5 मई को: IIT प्रशासन बैकफुट पर
आइआइटी की ओर से कोर्ट में पक्ष रखते हुए जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा गया है। कोर्ट ने राहत देते हुए मामले की अगली सुनवाई 5 मई, 2026 निर्धारित की है। तब तक आइआइटी प्रशासन स्कूल की गतिविधियों में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा। यह फैसला उन संस्थानों के लिए एक नजीर है जो नियमों को ताक पर रखकर मनमाना फैसला लेते हैं।