शहर को विज्ञापन से पाटा, पर सरकारी खजाना चाटा; निगम ने 54 एजेंसियों की खोली पोल, 107 करोड़ का हिसाब बाकी! जानें सबसे बड़े बकाएदार
पटना नगर निगम ने शहर की प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. निगम द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 54 विज्ञापन एजेंसियों पर कुल 107.12 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व बकाया है
Patna - पटना नगर निगम ने विज्ञापन एजेंसियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बकाया राजस्व की विस्तृत सूची जारी की है, जिसमें शहर की 54 प्रमुख एजेंसियों पर कुल 107.12 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि लंबित दिखाई गई है । निगम के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बकाये में मूल राशि 79 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि समय पर भुगतान न होने के कारण ब्याज का हिस्सा भी 33.63 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है । अब तक एजेंसियों की ओर से महज 5.51 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया गया है, जो कुल मांग के मुकाबले काफी कम है ।
बकाएदारों की इस सूची में Pratibha Advertising Pvt Ltd सबसे ऊपर है, जिस पर सर्वाधिक 12.69 करोड़ रुपये का बकाया है । इसके बाद M/s Century Ventures Pvt. Ltd का नाम आता है, जिसकी देनदारी 12.24 करोड़ रुपये से अधिक की है । इसके अलावा Kraft Outdoor Media Pvt Ltd पर 10.33 करोड़ रुपये और Brite Neons Signs Pvt. Ltd पर 6.14 करोड़ रुपये की राशि बकाया दर्ज की गई है । ये सभी एजेंसियां पटना के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों जैसे फ्रेजर रोड और डाकबंगला रोड से संचालित होती हैं ।
सूची में शामिल अन्य बड़ी एजेंसियों में Narmada Publicity पर 5.72 करोड़ रुपये और Nilgiri Publicity पर 6.06 करोड़ रुपये की लंबित राशि दिखाई गई है । रिपोर्ट यह भी बताती है कि Adam Media and Recreation Pvt. Ltd जैसी कंपनियों पर 2.32 करोड़ रुपये का बकाया है, जिन्होंने 1.99 करोड़ की मूल राशि के मुकाबले अब तक केवल 48.74 लाख रुपये ही जमा किए हैं । विज्ञापन राजस्व की यह लंबी सूची दर्शाती है कि शहर के कई बड़े मीडिया हाउस और एजेंसियां लंबे समय से निगम के कर का भुगतान नहीं कर रही हैं ।
नगर निगम प्रशासन अब इन बकाएदार एजेंसियों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की तैयारी में है। अधिकारियों का मानना है कि राजस्व की इस बड़ी हानि से शहर के विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है। निगम द्वारा जारी इस सार्वजनिक मांग पत्र (Outstanding Demand) का उद्देश्य एजेंसियों पर दबाव बनाना है ताकि वे जल्द से जल्द अपने खातों का निपटान करें । यदि निर्धारित समय के भीतर बकाये का भुगतान नहीं होता है, तो विज्ञापन बोर्डों को जब्त करने और एजेंसियों का लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है ।
वित्तीय आंकड़ों का यह विश्लेषण बताता है कि पटना के शहरी क्षेत्र में विज्ञापन का बाजार तो फल-फूल रहा है, लेकिन सरकारी खजाने में उसका उचित हिस्सा नहीं पहुंच रहा है । कुल बकाये में ब्याज की राशि का लगातार बढ़ना यह संकेत देता है कि यह विवाद पुराना है और एजेंसियां वित्तीय देनदारियों को टालती आ रही हैं । आने वाले दिनों में नगर निगम की इस सख्ती का असर विज्ञापन जगत और शहर के राजस्व संग्रह पर व्यापक रूप से पड़ने की संभावना है ।


रिपोर्ट - वंदना शर्मा