पटना पुलिस की नजर पर सवाल, आंख जांच में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत, क्या ऐसे पकड़े जाएंगे अपराधी?
Bihar Police:पुलिस की मुस्तैदी और कानून-व्यवस्था की निगहबानी के बीच अब उनके सेहत की हिफ़ाज़त पर भी फोकस तेज़ हो गया है। ....
Bihar Police:पुलिस की मुस्तैदी और कानून-व्यवस्था की निगहबानी के बीच अब उनके सेहत की हिफ़ाज़त पर भी फोकस तेज़ हो गया है। इसी कड़ी में सोमवार को शास्त्रीनगर थाना परिसर में पुलिसकर्मियों के लिए विशेष आंख जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस मेडिकल कैंप में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मियों ने अपनी आंखों की जांच कराई। जांच के नतीजे चौंकाने वाले रहे शास्त्रीनगर थाने में पदस्थापित करीब 40 प्रतिशत पुलिसकर्मियों में किसी न किसी तरह की आंखों की समस्या पाई गई।
यह शिविर शंकर ज्योति नेत्रालय की ओर से आयोजित किया गया, जो पटना के विभिन्न थानों में स्वास्थ्य जागरूकता की मुहिम चला रहा है। इससे पहले गर्दनीबाग, सचिवालय, कदमकुआं, राजीव नगर और दीघा थाने में भी इस तरह के शिविर लगाए जा चुके हैं। अब तक करीब 200 पुलिसकर्मियों की आंखों की जांच की जा चुकी है। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में सामने आया कि विभिन्न थानों में तैनात लगभग 50 प्रतिशत पुलिसकर्मियों को नज़दीक देखने में परेशानी है, जबकि 10 प्रतिशत को दूर की चीज़ें साफ़ दिखाई नहीं देतीं।
डॉक्टरों ने जांच के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को आगे के इलाज और जरूरी सावधानियों के बारे में तफ़सील से जानकारी दी। राहत की बात यह रही कि जांच में किसी भी पुलिसकर्मी में ग्लूकोमा या कॉर्निया से जुड़ी गंभीर बीमारी नहीं पाई गई। इसके अलावा कलर ब्लाइंडनेस की भी कोई शिकायत सामने नहीं आई, जिसे मेडिकल विशेषज्ञों ने सकारात्मक संकेत बताया।
हालांकि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि करीब 30 प्रतिशत पुलिसकर्मियों को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है। ऐसे पुलिसकर्मियों को डॉक्टरों ने विशेष तौर पर रेटिना जांच कराने की सलाह दी है, क्योंकि शुगर और बीपी का सीधा असर आंखों की सेहत पर पड़ता है। इसके साथ ही उन्हें दवा, खान-पान और नियमित जांच को लेकर जरूरी हिदायतें भी दी गईं। शिविर के दौरान दो पुलिसकर्मी ऐसे भी पाए गए, जिनमें मोतियाबिंद की शुरुआती शिकायत मिली।
पटना पुलिस की ओर से बताया गया कि यह शिविर स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत पटना मध्य क्षेत्र के थानों में आयोजित किया जा रहा है। मकसद यह है कि ड्यूटी के दबाव और तनाव में काम कर रहे पुलिसकर्मियों की सेहत को मजबूत किया जाए, ताकि वे पूरी मुस्तैदी और साफ़ नज़र के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
रिपोर्ट- अभिजीत सिंह