Patna Ring Road: पटना रिंग रोड पर लगा ब्रेक! फंड, फाइल और सुस्ती में फंसा बिहार का ड्रीम प्रोजेक्ट

Patna Ring Road: राजधानी पटना को जाम से निजात दिलाने और उत्तर-दक्षिण बिहार को सीधे जोड़ने वाला 173.5 किलोमीटर लंबा पटना रिंग रोड अब सरकारी सुस्ती, फंड की कमी और कागजी पेचीदगियों का शिकार बन गया है।

Patna Ring Road Stuck in Red Tape Funds and Land Row
पटना रिंग रोड पर लगा ब्रेक! - फोटो : social Media

Patna Ring Road: बिहार की सियासत में विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार अब अपने ही ड्रीम प्रोजेक्ट के जाल में उलझती नजर आ रही है। राजधानी पटना को जाम से निजात दिलाने और उत्तर-दक्षिण बिहार को सीधे जोड़ने वाला 173.5 किलोमीटर लंबा पटना रिंग रोड अब सरकारी सुस्ती, फंड की कमी और कागजी पेचीदगियों का शिकार बन गया है। सबसे अहम हिस्सा कन्हौली से शेरपुर तक 8.48 किलोमीटर की सिक्स लेन सड़क दो महीने से फाइलों के जंगल में कैद है।

एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी का चयन कर लिया, लेकिन जिला प्रशासन अब तक जमीन हैंडओवर नहीं कर पाया। नतीजा यह कि एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी नहीं हो सका। सत्ता के गलियारों में अब यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर बिहार का यह मेगा प्रोजेक्ट अफसरशाही की सुस्ती की भेंट क्यों चढ़ रहा है? तीन जिलों पटना, सारण और वैशाली से गुजरने वाला यह रिंग रोड तैयार होने के बाद राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है। यूपी, झारखंड और उत्तर बिहार से आने वाले भारी वाहन सीधे रिंग रोड से गुजरेंगे और पटना शहर को जाम से राहत मिलेगी। लेकिन फिलहाल जमीनी हकीकत यह है कि परियोजना की रफ्तार फाइलों के बोझ तले दम तोड़ती दिख रही है।

177.07 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए 254.37 करोड़ रुपए मुआवजा तय हुआ, लेकिन अब तक सिर्फ 12.52 करोड़ रुपए ही बांटे जा सके हैं। 912 अवार्ड तैयार हैं, मगर किसानों तक पैसा नहीं पहुंचा। वजह पारिवारिक बंटवारे का विवाद, कई दावेदार और मुआवजा बढ़ाने की मांग।

सबसे बड़ा सियासी पेच फंड को लेकर है। केंद्र सरकार ने अपने हिस्से के 127 करोड़ रुपए जारी कर दिए, लेकिन राज्य सरकार का हिस्सा अब तक पथ निर्माण विभाग से नहीं पहुंचा। विपक्ष अब इसे डबल इंजन की ढीली रफ्तार बता रहा है, जबकि सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया का हवाला देकर बचाव में जुटी है।13 जनवरी 2026 को राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है क्या बिहार का यह महत्वाकांक्षी रिंग रोड राजनीतिक बयानबाजी और अफसरशाही की लापरवाही में ही फंसकर रह जाएगा?