खजाना खुला! पटना के स्कूलों के 'कचरा बिल' पर सरकार का बड़ा फैसला, करोड़ों के बकाये के बीच जारी हुई पहली किस्त
पटना के सरकारी स्कूलों पर बकाया ₹1.58 करोड़ के नगर निगम टैक्स को लेकर शिक्षा विभाग ने ₹20 लाख की पहली किस्त जारी की। दिसंबर 2025 तक के कचरा बिल और सेवा शुल्क का होगा निपटारा ।
Patna - : पटना के सरकारी स्कूलों पर नगर निगम का करोड़ों का 'सर्विस टैक्स' बकाया था, जिसे लेकर शिक्षा विभाग ने अब तिजोरी खोल दी है। दिसंबर 2025 तक के भारी-भरकम बिल के भुगतान के लिए 20 लाख रुपये की तत्काल स्वीकृति दी गई है ।
पटना नगर निगम का करोड़ों का बकाया और सरकारी पहल
पटना नगर निगम ने शहर के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के भवनों और परिसरों पर सेवा शुल्क (Service Charge) और ठोस कचरा प्रबंधन शुल्क के मद में एक बड़ी राशि की मांग की थी । नगर आयुक्त द्वारा 22 दिसंबर 2025 को भेजी गई अधियाचना के अनुसार, यह कुल बकाया राशि ₹1,58,01,036/- (एक करोड़ अठावन लाख एक हजार छत्तीस) रुपये तक पहुँच गई थी । इस भारी वित्तीय बोझ को कम करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने अब कदम बढ़ाए हैं।
20 लाख रुपये की तत्काल वित्तीय स्वीकृति
नगर निगम की ₹1.58 करोड़ की मांग के विरुद्ध, शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट से ₹20,00,000/- (बीस लाख) रुपये की राशि को तत्काल प्रभाव से स्वीकृत और विमुक्त (Release) कर दिया है । यह राशि दिसंबर 2025 तक के सेवा शुल्क और कचरा प्रबंधन शुल्क के आंशिक भुगतान के रूप में दी जा रही है, जिसमें ब्याज और पेनल्टी की राशि भी शामिल है । यह भुगतान 'किराया महसूल एवं कर' मद के अंतर्गत किया जा रहा है ।
भुगतान की प्रक्रिया और डिजिटल मोड का उपयोग
शिक्षा विभाग के उप सचिव अजय सतीश भेंगरा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस राशि की निकासी सचिवालय कोषागार, विकास भवन से की जाएगी । पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह राशि सीधे पटना नगर निगम के बैंक खाते (Account Name: Patna Municipal Corporation-Online Tax Collection) में ऑनलाइन ट्रांसफर की जाएगी । विभाग ने स्पष्ट किया है कि राशि का हस्तांतरण CFMS (Comprehensive Financial Management System) के माध्यम से उप निदेशक (प्रशासन) द्वारा किया जाएगा ।
अधिकारियों को सख्त निर्देश और जवाबदेही
सरकार ने इस राशि के उपयोग को लेकर कड़े नियम भी लागू किए हैं। नगर आयुक्त, पटना को यह सुनिश्चित करना होगा कि राशि की निकासी के दो महीने के भीतर वे इसकी वित्तीय और भौतिक उपलब्धि की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप दें । विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि किसी भी स्थिति में राशि का विचलन (Diversion) या अपव्यय (Wastage) नहीं होना चाहिए ।
स्कूलों से 'नो ऑब्जेक्शन' प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य
भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, नगर निगम को संबंधित माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (School Heads) से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC) प्राप्त करना होगा । यह प्रमाणपत्र विभाग को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, जिससे यह पुष्टि हो सके कि संबंधित विद्यालय के परिसरों पर अब उस अवधि का कोई शुल्क बकाया नहीं है । इस आदेश पर अपर मुख्य सचिव का अनुमोदन भी प्राप्त है ।