गंगा की लहरों पर दौड़ेगी मेट्रो: पटना वाटर मेट्रो में 908 करोड़ का निवेश, हाजीपुर-सोनपुर भी जुड़ेंगे

बिहार की राजधानी पटना में लोगों जल्द ही वाटर मेट्रो की सौगात मिलने वाली है. पटना के गांधी घाट पर चार्जिंग प्वाइंट के निर्माण का काम अभी शुरू हुआ है. कंगन घाट और दीघा घाट पर भी इसका निर्माण होना प्रस्तावित है.

Patna Water Metro to see Rs 908 crore investment Hajipur Son
गंगा की लहरों पर दौड़ेगी मेट्रो: पटना वाटर मेट्रो में 908 करोड़ का निवेश, हाजीपुर-सोनपुर भी जुड़ेंगे- फोटो : news 4 nation

बिहार की राजधानी पटना में यातायात के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। शहर को जल्द ही वाटर मेट्रो की सौगात मिलने वाली है, जिस पर लगभग 908 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य न केवल पटना की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करना है, बल्कि पर्यटन और नदी परिवहन को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाना भी है। गांधी घाट पर चार्जिंग पॉइंट के निर्माण के साथ इस प्रोजेक्ट ने अब रफ्तार पकड़ ली है।

गांधी घाट से गायघाट तक पहला पड़ाव: 10.5 किमी का सफर

वाटर मेट्रो का पहला चरण 10.5 किलोमीटर लंबा होगा, जिसके मुख्य पड़ाव गांधी घाट और गायघाट तय किए गए हैं। शुरुआत में यह मार्ग दीघा और कंगन घाट के बीच संचालित होगा। यह सफर न केवल यात्रियों के समय की बचत करेगा, बल्कि गंगा की लहरों के बीच एक सुखद यात्रा का अनुभव भी प्रदान करेगा। भविष्य में इस नेटवर्क का विस्तार कर इसमें 10 टर्मिनल और 4 रूट जोड़ने की योजना है।

हाजीपुर और सोनपुर तक विस्तार का मास्टर प्लान

पटना वाटर मेट्रो सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रहेगी। दूसरे चरण में इसे हाजीपुर और सोनपुर तक विस्तारित करने की योजना है। यह रूट कंगन घाट से शुरू होकर गायघाट, गांधी घाट, दीघा घाट होते हुए पानापुर, काली घाट (सोनपुर) और छेछर घाट तक जाएगा। इससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच जलमार्ग के जरिए कनेक्टिविटी और भी मजबूत हो जाएगी।

हाई-टेक सुविधाएं: एसी बोट और अत्याधुनिक सुरक्षा

पर्यटकों की सुविधा के लिए वाटर मेट्रो को पूरी तरह वातानुकूलित (AC) बनाया जा रहा है। इसमें 'एमवी-गोमधर कुंवर' नामक बोट का इस्तेमाल होगा, जिसकी एक इकाई की कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये है। सुरक्षा के लिहाज से ये नावें सीसीटीवी कैमरों और ऑटोमेटिक बोट लोकेशन सिस्टम से लैस होंगी। आपात स्थिति के लिए 3-4 रेस्क्यू बोट भी तैनात रहेंगी। खास बात यह है कि ये हाइब्रिड मोड पर चलेंगी, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

संयुक्त प्रयास और नई तकनीक का संगम

यह मेगा प्रोजेक्ट इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) और बिहार सरकार का एक संयुक्त प्रयास है। इस परियोजना को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए कोच्चि शिपयार्ड के इंजीनियरों की मदद ली जा रही है। बोट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे तेज रफ्तार में भी कम लहरें पैदा करें, जिससे नदी के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर बुरा असर न पड़े।