Pension Yojana: बुढ़ापे की गारंटी पर बड़ा फैसला, पेंशन योजना में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी, ₹5,000 से बढ़कर ₹10,000 मासिक पेंशन का रास्ता साफ

Pension Yojana: देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाने की तैयारी में है।

Pension Yojana: बुढ़ापे की गारंटी पर बड़ा फैसला, पेंशन योजना
बुढ़ापे की गारंटी पर बड़ा फैसला- फोटो : social Media

Pension Yojana: देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाने की तैयारी में है। वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक न्याय के एजेंडे को मजबूत करते हुए वित्त मंत्रालय अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मासिक पेंशन की अधिकतम सीमा को ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 करने पर गंभीर मंथन कर रहा है।

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने इस प्रस्ताव को सरकार के समक्ष पहले ही भेज दिया है। इस संभावित फैसले को एक नीतिगत क्रांति के तौर पर देखा जा रहा है, जो लाखों निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के भविष्य को सीधे प्रभावित कर सकता है।

2015 में शुरू हुई इस योजना का मकसद था रेहड़ी-पटरी वालों, खेतिहर मजदूरों और छोटे कारोबारियों को बुढ़ापे में एक निश्चित मासिक आय की गारंटी देना। फिलहाल योजना के तहत ₹1,000 से ₹5,000 तक की पेंशन दी जाती है, लेकिन महंगाई के बढ़ते दबाव और जीवन यापन की लागत में इजाफे के चलते यह राशि अब अपर्याप्त मानी जा रही है।

सरकार का मानना है कि यदि पेंशन सीमा को ₹10,000 तक बढ़ाया जाता है, तो यह योजना सिर्फ गरीब और निम्न वर्ग तक सीमित न रहकर मध्यम वर्ग के लिए भी आकर्षक विकल्प बन सकती है। इससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होगा और वेलफेयर स्टेट की अवधारणा को मजबूती मिलेगी।

हालांकि इस प्रस्ताव के साथ कुछ नई शर्तें भी जुड़ सकती हैं। अधिक पेंशन पाने के लिए मासिक अंशदान बढ़ेगा, जो उम्र और प्रवेश की अवधि के आधार पर तय होगा। साथ ही विशेषज्ञों का सुझाव है कि अधिक पेंशन स्लैब के लिए उम्र सीमा में भी कुछ लचीलापन दिया जा सकता है। मौजूदा नियम के अनुसार योजना में शामिल होने की अधिकतम आयु 40 वर्ष है।

सबसे अहम बात यह है कि यह योजना संप्रभु गारंटी पर आधारित है, यानी इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। इसी वजह से यह अन्य निजी निवेश विकल्पों की तुलना में अधिक भरोसेमंद मानी जाती है।

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा इस योजना को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी भी दी गई है, जो इसकी दीर्घकालिक नीति को दर्शाता है। अब सबकी निगाहें वित्त मंत्रालय के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो करोड़ों लोगों के रिटायरमेंट भविष्य की दिशा तय कर सकता है।