PMCH में डॉक्टरों का टोटा, चरमराई इलाज और मेडिकल पढ़ाई की व्यवस्था
Patna PMCH: बिहार के लोगों की जान बचाने वाला और सूबे का सबसे बड़ा पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल इन दिनों बीमारी से गुजर रहा है। ...
Patna PMCH: बिहार के लोगों की जान बचाने वाला और सूबे का सबसे बड़ा पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल इन दिनों बीमारी से गुजर रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों और शिक्षकों की भारी कमी के सबब न सिर्फ़ मरीज़ों के इलाज पर आई है, बल्कि MBBS और PG के पढ़ाई और क्लिनिकल ट्रेनिंग भी दाँव पर लग गई है। अस्पताल में कुल 589 स्वीकृत फैकल्टी पदों में केवल 386 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 203 पद रिक्त हैं। प्रोफेसर के 96 स्वीकृत पदों में 58 पर ही नियुक्ति है और 38 खाली हैं। एसोसिएट प्रोफेसर के 175 पदों में केवल 74 कार्यरत हैं, जबकि 101 पद रिक्त हैं। इस कमी ने व्यवस्था की कमर तोड़ दी है।
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर: सबसे गंभीरसूरत-ए-हाल असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के सतह पर है, जहाँ 318 ओहदों में से महज़ 71 डॉक्टर तायनात हैं और 247 ओहदे ख़ाली हैं। यानी तक़रीबन 78 फ़ीसद जॉयदादें ख़ाली पड़ी हैं।
प्रोफ़ेसर व एसोसिएट प्रोफ़ेसर: 318 स्वीकृत पदों में सिर्फ 71 पर डॉक्टर कार्यरत हैं और 247 पद खाली हैं। यानी इस स्तर पर करीब 78 फीसदी पद रिक्त हैं। एसोसिएट प्रोफ़ेसर के 175 में से 101 ओहदे ख़ाली हैं। ट्यूटर, डिमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेज़िडेंट के 229 ओहदों में से 110 पर कोई नियुक्ति नहीं हुई है।
मेडिसिन विभाग में 40 पद, डॉक्टर सिर्फ 9
PMCH का मेडिसिन विभाग सबसे अधिक मरीजों का दबाव झेलने वाले विभागों में है। यहां रोजाना करीब 400 से 500 मरीज OPD में पहुंचते हैं। इसके बावजूद 40 स्वीकृत फैकल्टी पदों के मुकाबले महज 9 शिक्षक कार्यरत हैं।विभाग में 9 स्वीकृत प्रोफेसर पदों में सिर्फ 3 प्रोफेसर हैं। 12 एसोसिएट प्रोफेसर पदों में केवल 1 डॉक्टर कार्यरत है, जबकि 19 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों में सिर्फ 5 पर नियुक्ति है।ऐसी स्थिति में वार्ड राउंड, गंभीर मरीजों के उपचार, ओपीडी, इमरजेंसी सुपरविजन और पीजी छात्रों की क्लिनिकल ट्रेनिंग का जिम्मा सीमित संख्या में डॉक्टरों पर आ गया है।
बर्न वार्ड में एक वरिष्ठ शिक्षक पर बड़ी जिम्मेदारी
PMCH के बर्न विभाग की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। अस्पताल में 60 बेड का बर्न वार्ड है, जहां राज्यभर से गंभीर रूप से झुलसे मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बताया गया है कि विभाग में महज एक एसोसिएट प्रोफेसर कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, एक वरिष्ठ शिक्षक पर मरीजों के उपचार के साथ 8 PG डॉक्टरों की ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भी है। बर्न मरीजों में लगातार निगरानी और समय पर क्लिनिकल निर्णय की जरूरत होती है। ऐसे में सीमित फैकल्टी के कारण इलाज और प्रशिक्षण दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
सर्जरी में 5 प्रोफेसर की जगह सिर्फ 2
सर्जरी विभाग भी फैकल्टी संकट से अछूता नहीं है। यहां 5 प्रोफेसर पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ 2 प्रोफेसर कार्यरत हैं। गंभीर मरीजों और जटिल ऑपरेशन वाले इस विभाग में वरिष्ठ सर्जनों की कमी अस्पताल की व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है।वहीं स्किन विभाग में प्रोफेसर का पद खाली बताया गया है। रेडियोलॉजी, चेस्ट एवं रेस्पिरेटरी मेडिसिन, एनेस्थीसिया, ENT, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी समेत कई विभागों में भी स्वीकृत पदों के मुकाबले फैकल्टी कम है।
PMCH में 96 प्रोफेसर पद स्वीकृत हैं, जिनमें 58 पर नियुक्ति और 38 पद रिक्त हैं। यानी प्रोफेसर स्तर पर भी करीब 40 फीसदी पद खाली हैं।मेडिसिन के अलावा एनेस्थीसिया, ऑर्थोपेडिक्स, ENT, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, कम्युनिटी मेडिसिन और फिजियोलॉजी जैसे विभाग भी फैकल्टी की कमी से प्रभावित बताए जा रहे हैं।कई विभागों में पहले से ही गिने-चुने वरिष्ठ चिकित्सक कार्यरत हैं। ऐसे में वरिष्ठ डॉक्टरों की अनुपस्थिति में एक भी डॉक्टर की रूहसत् छुट्टी से निज़ाम दरहम-बरहम हो जाता है। अगर हुकूमत ने इस चिंताजनक कमी को पूरा करने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए, तोवरिष्ठ चिकित्सक जटिल मामलों में उपचार का निर्णय लेने, ऑपरेशन की निगरानी करने, वार्ड राउंड और जूनियर डॉक्टरों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।ऐसे में PMCH जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में लंबे समय तक फैकल्टी के पद खाली रहना मरीजों के इलाज, मेडिकल शिक्षा और क्लिनिकल ट्रेनिंग तीनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।