सावधान! 'रील' के चक्कर में 'किलर' बन रहे बच्चे; छह महीने में 1700 बार ट्रेनों पर पथराव, बिहार देश में नंबर 2, रेलवे ने शुरू की ड्रोन से हंटिंग!

भारतीय रेल की सुरक्षा के लिए 'पत्थरबाज' एक बड़ा सिरदर्द बन गए हैं। बीते 6 महीनों में पथराव की 1,698 वारदातों ने रेलवे प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसमें उत्तर रेलवे के बाद बिहार-झारखंड वाला पूर्व मध्य रेलवे जोन सबसे अधिक प्रभावित पाया गया है।

सावधान! 'रील' के चक्कर में 'किलर' बन रहे बच्चे; छह महीने में

Patna -  भारतीय रेल की सुरक्षा के लिए 'पत्थरबाज' एक बड़ा सिरदर्द बन गए हैं। बीते 6 महीनों में पथराव की 1,698 वारदातों ने रेलवे प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसमें उत्तर रेलवे के बाद बिहार-झारखंड वाला पूर्व मध्य रेलवे जोन सबसे अधिक प्रभावित पाया गया है। 

महीने में 1698 हमले: रेलवे के डरावने आंकड़े

देशभर में पटरियों के किनारे से गुजरती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाएं अब एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गई हैं। रेलवे द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल जुलाई से दिसंबर के बीच कुल 1,698 पथराव की घटनाएं दर्ज की गईं। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए रेलवे ने अब तक 665 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा है, लेकिन हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

पत्थरबाजी में 'पूर्व मध्य रेलवे' दूसरे स्थान पर

ट्रेनों पर हमलों के मामले में उत्तर रेलवे (363 केस) पहले स्थान पर है, जबकि बिहार के हाजीपुर मुख्यालय वाला पूर्व मध्य रेलवे (ECR) 219 मामलों के साथ देश में दूसरे नंबर पर रहा। इसके अलावा दक्षिण मध्य रेलवे में 140 और उत्तर मध्य रेलवे में 126 घटनाएं हुईं। इन आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि बिहार और उत्तर प्रदेश से गुजरने वाली ट्रेनों के शीशे और यात्रियों की जान सबसे ज्यादा खतरे में है।

'रील' के चक्कर में 'रियल' जान जोखिम में

जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। कई मामलों में पाया गया कि नाबालिग बच्चे रेल पटरियों के किनारे 'रील' (Social Media Reels) बनाते समय रोमांच के लिए या शौक में ट्रेनों पर पथराव कर रहे हैं। नाबालिगों की इस संलिप्तता ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि यह न केवल यात्रियों के लिए घातक है बल्कि इन बच्चों के भविष्य को भी बर्बाद कर रहा है।

संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और CCTV का पहरा

पथराव की बार-बार हो रही वारदातों को देखते हुए रेलवे ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। पूर्व मध्य रेलवे की सीसीआरओ सरस्वती चंद्रा ने बताया कि जिन इलाकों को 'हॉटस्पॉट' (संवेदनशील) के रूप में चिन्हित किया गया है, वहां अब सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए आसमान से निगरानी रखी जा रही है। साथ ही आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीमें पटरियों के किनारे गश्त कर रही हैं।

यात्रियों की सुरक्षा पर रेलवे का कड़ा रुख

रेलवे अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि पत्थरबाजों के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। पकड़े जाने पर आरोपियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है। विभाग का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में जागरूकता फैलाना और निगरानी बढ़ाना है जहां ये घटनाएं बार-बार दोहराई जा रही हैं, ताकि यात्रियों का सफर सुगम और सुरक्षित बना रहे।