संसद में गूँजी 'आरजेडी' की दहाड़: सांसद संजय यादव ने मोदी सरकार को घेरा, पूछा- 26 लाख करोड़ की कर्ज माफी में एक भी दलित-पिछड़ा क्यों नहीं?
राजद सांसद संजय यादव ने संसद में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने ₹26 लाख करोड़ की कर्ज माफी को पूंजीपतियों का तुष्टिकरण बताते हुए इसे दलितों और पिछड़ों के साथ अन्याय करार दिया।
Patna - : राज्यसभा में 'दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक' पर चर्चा के दौरान राजद सांसद श्री संजय यादव ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है । उन्होंने सरकार पर पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुँचाने के लिए देश के संसाधनों की बलि चढ़ाने का गंभीर आरोप लगाया । सांसद ने आंकड़ों के हवाले से सरकार की आर्थिक नीतियों को गरीब विरोधी और असमानता बढ़ाने वाला करार दिया है ।
आधा बजट 'बट्टे खाते' में: पूंजीपतियों पर मेहरबानी क्यों?
संजय यादव ने सदन में दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने पूंजीपतियों का ₹26 लाख करोड़ का ऋण माफ किया है । उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार ने अपने 'पूंजीपति मित्रों' के लिए देश का लगभग आधा बजट बट्टे खाते में डाल दिया है । सांसद ने सवाल उठाया कि इस विशाल धनराशि में देश के उन किसानों, मजदूरों और छात्रों का कितना हिस्सा है जो कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं ।
सामाजिक पृष्ठभूमि पर सवाल: कहाँ हैं दलित, पिछड़े और आदिवासी?
राजद सांसद ने कर्ज माफी के लाभार्थियों की सामाजिक पृष्ठभूमि पर बड़ा सवाल खड़ा किया । उन्होंने पूछा कि जिन पूंजीपतियों का ₹26 लाख करोड़ माफ किया गया, उनमें से एक भी व्यक्ति दलित, पिछड़ा या आदिवासी वर्ग से क्यों नहीं है? उन्होंने आरोप लगाया कि यह ऋण माफी केवल एक खास वर्ग और सरकार के करीबियों तक सीमित है, जबकि वंचित समाज को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया है ।
किसान की गाय-भैंस तक खोल ले जाती है सरकार: दोहरा मापदंड
सरकार के दोहरे मापदंडों पर हमला करते हुए संजय यादव ने कहा कि जब देश का गरीब या किसान बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए ₹5-10 हजार का ऋण लेता है, तो पूरा बैंकिंग सिस्टम उसकी 'गर्दन पर पैर' रखकर वसूली करता है । उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वसूली के नाम पर गरीबों की गाय-भैंस तक खोल ली जाती है, लेकिन ₹26 लाख करोड़ हड़पने वाले पूंजीपतियों पर सरकार मेहरबान रहती है ।
अर्थव्यवस्था का काला सच: अमीरों के पास 40% संपत्ति, गरीबों के पास मात्र 3%
'World Inequality Lab' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सांसद ने बताया कि भारत दुनिया के सबसे असमान देशों में से एक बन गया है । देश की शीर्ष 1% आबादी के पास 22.6% आय और 40% संपत्ति है, जबकि निचले 60% लोगों के पास कुल संपत्ति का मात्र 3% हिस्सा ही बचा है । उन्होंने कहा कि चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था का ढोल पीटने के बजाय सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रति व्यक्ति आय में भारत 195 देशों की सूची में 141वें स्थान पर क्यों पिछड़ा हुआ है ।