तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार से पूछे 15 सवाल, 19 अगस्त के राजभवन मार्च से लालू भी हुए सक्रिय

तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि अगर AK-47 गलत ड्यूटी पर पहुंची थी तो केवल सिपाही को निलंबित करना पर्याप्त है या हथियार जारी करने वाले अधिकारी की भी जवाबदेही तय होगी।

Tejashwi Yadav Targets Samrat Government
Tejashwi Yadav Targets Samrat Government- फोटो : news4nation

Bihar News :  राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आह्वान पर 19 अगस्त को पटना में प्रस्तावित राजभवन मार्च से पहले बिहार की सियासत गरमा गई है। मंगलवार को तेजस्वी यादव ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई फायरिंग को लेकर एनडीए सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार से 15 सवाल पूछते हुए पूरे मामले में पुलिस की भूमिका, हथियारों के आवंटन और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।


तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर ‘छात्र-छात्राओं के सवाल, सरकार दे जवाब!’ शीर्षक से पोस्ट जारी किया। उन्होंने सबसे पहले सवाल उठाया कि छात्रों पर फायरिंग करने वाले निलंबित सिपाही के पास AK-47 पहुंची कैसे। उन्होंने पूछा कि यह हथियार किस यूनिट या शस्त्रागार से जारी किया गया था और इसे जारी करने का आदेश किस अधिकारी ने दिया था।


राजद नेता ने आरोपी सिपाही की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि वह किस यूनिट में तैनात था, क्या वह जिला पुलिस का हिस्सा था या किसी विशेष इकाई जैसे STF/SIT से जुड़ा था। अगर वह किसी विशेष बल का जवान था तो उसकी वास्तविक तैनाती और जिम्मेदारी क्या थी, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।


तेजस्वी ने सवाल किया कि छात्र प्रदर्शन और सामान्य कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में AK-47 जैसे हथियार के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी थी। उन्होंने Crowd Management के SOP के पालन पर भी सवाल उठाया। साथ ही पूछा कि फायरिंग का आदेश किसने दिया और संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

उन्होंने हथियार से जुड़े रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए पूछा कि कुल कितनी गोलियां चलीं और कितने राउंड जारी किए गए थे। इस्तेमाल किए गए हथियार का बैलिस्टिक और फॉरेंसिक परीक्षण हुआ या नहीं, इसकी जानकारी भी सरकार से मांगी गई। इसके अलावा तेजस्वी ने पूछा कि क्या मौके पर बॉडी कैमरा या अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, जिससे फायरिंग से पहले और बाद की पूरी गतिविधि सामने आ सके।


तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि अगर AK-47 गलत ड्यूटी पर पहुंची थी तो केवल सिपाही को निलंबित करना पर्याप्त है या हथियार जारी करने वाले अधिकारी की भी जवाबदेही तय होगी। उन्होंने जांच को केवल गोली चलाने वाले जवान तक सीमित रखने के बजाय पूरी कमांड-चेन की जांच की मांग की।


उन्होंने गृह विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाया और पूछा कि हथियारों की तैनाती तथा कानून-व्यवस्था की पूरी व्यवस्था की निगरानी कैसे होती है। साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या मामले की विभागीय जांच पर्याप्त होगी या स्वतंत्र जांच के जरिए हथियार आवंटन से लेकर कमांड-चेन तक की पड़ताल की जाएगी। तेजस्वी ने कहा कि राज्य की जनता और खासकर युवा यह जानना चाहते हैं कि इस मामले में मुख्यमंत्री चुप क्यों हैं।


लालू यादव ने भी सरकार पर बोला हमला

इससे पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए छात्र-युवा आंदोलन का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा पेपर लीक, बदहाल शिक्षा व्यवस्था, पक्षपातपूर्ण बहाली प्रक्रिया और बेरोजगारी से परेशान हैं। लालू यादव ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक मांगों को सुनने के बजाय AK-47 से गोलियां बरसा रही है।


लालू यादव ने छात्रों और युवाओं से 19 अगस्त को पटना में एकजुट होने की अपील करते हुए इसे सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष बताया। ऐसे में राजभवन मार्च से पहले राजद के दोनों शीर्ष नेताओं के हमले ने बिहार की सियासत में इस मुद्दे को और गरमा दिया है।

रंजन की रिपोर्ट