Bihar News : पटना हाईकोर्ट की मानवीय पहल, माता-पिता के विवाद में बच्चे के लिए की अनोखी अंतरिम व्यवस्था, मां के पास रहेगा बच्चा, पिता रोज लाएंगे-ले जाएंगे स्कूल

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने एक छह वर्षीय मासूम के बचपन को सामान्य बनाए रखने के लिए एक अनुकरणीय और मानवीय अंतरिम व्यवस्था तय की है, जिससे न तो मां का स्नेह छिने और न ही पिता का साथ छूटे।

Bihar News : पटना हाईकोर्ट की मानवीय पहल, माता-पिता के विवाद
पटना हाईकोर्ट की मानवीय पहल - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने छह वर्षीय मासूम के बचपन को सामान्य बनाए रखने के लिए एक ऐसी अंतरिम व्यवस्था तय की, जिसमें न तो मां का स्नेह छिने और न ही पिता का साथ टूटे। कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि वैवाहिक विवाद का सबसे बड़ा खामियाजा बच्चों को नहीं भुगतना चाहिए। मां द्वारा पुत्र की बरामदगी के लिए दायर एकबंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद एवं जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने दोनों पक्षों, उनके स्वजनों तथा दोनों बच्चों से चैंबर में लंबी बातचीत की। 

कोर्ट ने पाया कि दोनों अभिभावक चिकित्सक हैं और बच्चे की देखभाल करने में सक्षम हैं। ऐसे में विवाद का समाधान किसी एक पक्ष की जीत-हार नहीं, बल्कि बच्चे के हित में होना चाहिए। खंडपीठ ने सहमति के आधार पर तय किया कि बच्चा फिलहाल मां के साथ रहेगा, लेकिन पिता प्रतिदिन उसे स्कूल छोड़ने और वापस घर लाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। सप्ताहांत, लंबी छुट्टियां और शिक्षा का खर्च भी दोनों अभिभावक साझा करेंगे।

सुनवाई का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब 12 वर्षीय बड़े बेटे ने कोर्ट के समक्ष कहा कि वह छुट्टियों में पिता के साथ समय बिताना चाहता है। कोर्ट ने इस भावनात्मक पहलू को भी आदेश का हिस्सा बनाया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पल्लवी पांडेय, मदन मोहन एवं ऋतिक शाह ने पक्ष रखा। पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र सिंह, मनीष झा, यश सिंह और प्रत्यूष प्रताप सिंह ने बहस की, जबकि राज्य की ओर से महाधिवक्ता एस.डी. संजय उपस्थित हुए। 

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को अभिभावकता वाद का छह माह में निस्तारण करने का निर्देश दिया है।