तीन दिवसीय हनुमत प्राण-प्रतिष्ठा और महायज्ञ का हुआ समापन, भक्तिरस में डूबे रहे हजारों श्रद्धालु

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Patna : जिले के नौबतपुर प्रखंड अंतर्गत करंजा गांव में आयोजित तीन दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ सह हनुमत प्राण-प्रतिष्ठा समारोह गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। भव्य पूर्णाहुति और महाभंडारे के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन हुआ। तीन दिनों तक चले इस आयोजन के दौरान पूरे क्षेत्र का माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसमें हिस्सा लेकर पुण्य लाभ कमाया।


यज्ञ केवल कर्मकांड नहींबल्कि विश्व कल्याण का मार्ग: उपेंद्र कृष्ण पराशर 

यज्ञ के अंतिम दिन आयोजित पूर्णाहुति कार्यक्रम में वाराणसी से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक उपेंद्र कृष्ण पराशर ने श्रद्धालुओं को ज्ञान गंगा से सराबोर किया। उन्होंने यज्ञ के वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व कल्याण और शांति का माध्यम है। उन्होंने गीता के श्लोक "यज्ञाद् भवति पर्जन्यः" का उल्लेख करते हुए समझाया कि यज्ञ से पर्यावरण शुद्ध होता है, समय पर वर्षा होती है और प्रकृति संतुलित रहती है। कलिकाल (कलयुग) में यह समाज को जोड़ने का उत्तम मार्ग है।


आचार्यों की टोली ने कराया वैदिक पूजनगूंजे जयकारे 

इस तीन दिवसीय महायज्ञ को वैदिक विधि-विधान के साथ आचार्य उपेंद्र पाण्डेय, राहुल पाण्डेय एवं सुरेन्द्र पाण्डेय की देखरेख में संपन्न कराया गया। प्रतिदिन सुबह से लेकर शाम तक वेदी पूजन, अर्चन और हवन का कार्यक्रम अनवरत चलता रहा। वहीं, संध्या काल में धार्मिक प्रवचन और महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। दूर-दराज के गांवों से आए भक्तों ने भगवान श्री लक्ष्मीनारायण और संकटमोचन हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।


कलश यात्रा से हुई थी शुरुआत

यह भव्य धार्मिक अनुष्ठान 12 मई 2026 से शुरू होकर 14 मई 2026 तक चला। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार को भव्य कलश शोभा यात्रा के साथ हुई थी, जिसमें पीले वस्त्र धारण किए सैकड़ों महिला श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। दूसरे दिन वेदी पूजन और होमादि कार्य किए गए। यह पूरा समारोह भागवत भाष्कर पुरुषोत्तमाचार्य (वराह मुद्देहरा स्थान) के पावन सान्निध्य और मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिससे क्षेत्र में चारों तरफ आध्यात्मिक चेतना का प्रसार हुआ।


महाप्रसाद वितरण के साथ आयोजन समिति ने जताया आभार 

यज्ञ समिति करंजा, नौबतपुर की ओर से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के रहने, पीने के पानी और महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजकों ने सफल समापन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन गांवों में आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करते हैं। यज्ञ की समाप्ति के बाद देर शाम तक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद (भंडारा) का वितरण होता रहा और सभी ने सुख, शांति तथा आरोग्य की कामना के साथ जयकारे लगाए।