Asha Bhosle Death : रेडियो-टीवी से बैन होने के बाद भी चार्टबस्टर रहा आशा भोसले का यह गाना, ताई ने जीता फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का अवार्ड
Asha Bhosle Death : भारतीय संगीत की दुनिया के लिए आज का दिन अत्यंत भारी और दुखद है। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके निधन की खबर मिलते ही फिल्म जगत और संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। सात दशक लंबे करियर में उन्होंने न केवल हजारों गाने गाए, बल्कि भारतीय पार्श्व गायन को एक नई पहचान और आधुनिकता भी प्रदान की।
आशा भोसले का करियर भारतीय सिनेमा के इतिहास का वह हिस्सा है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने 1940 के दशक से अपनी यात्रा शुरू की और समय के साथ अपनी आवाज को हर पीढ़ी के अनुकूल ढाला। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने भजन, गजल, कव्वाली और पॉप संगीत, हर विधा में अपनी श्रेष्ठता साबित की। उनकी कमी फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ पूरी कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उनके करियर के सबसे चर्चित पड़ावों में 1971 की फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का गाना ‘दम मारो दम’ हमेशा याद किया जाएगा। संगीतकार आर. डी. बर्मन और गीतकार आनंद बख्शी के साथ मिलकर तैयार किया गया यह गाना अपने समय से काफी आगे था। हालांकि, अपनी बोल्ड धुन और हिप्पी संस्कृति के चित्रण के कारण इसे तत्कालीन समाज में काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। विवाद इतना गहरा था कि ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने इस पर प्रतिबंध तक लगा दिया था।
विरोध के बावजूद, यह गाना युवाओं के बीच एक 'एंथम' बन गया और इसने आशा जी को संगीत की दुनिया की सबसे साहसी गायिका के रूप में स्थापित किया। इसी विवादित और कल्ट क्लासिक गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का पुरस्कार भी मिला। यह गाना आज भी भारतीय पॉप संगीत का सबसे प्रतिष्ठित उदाहरण माना जाता है और नई पीढ़ी के बीच भी उतना ही लोकप्रिय है जितना वह दशकों पहले था।
आशा भोसले भले ही आज हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके गाए हुए अनगिनत गीत उनकी याद को हमेशा जीवित रखेंगे। वे पीछे यादों का एक ऐसा खजाना छोड़ गई हैं, जो आने वाली कई पीढ़ियों के संगीतकारों का मार्गदर्शन करता रहेगा। आज पूरा देश नम आंखों से अपनी चहेती गायिका को विदाई दे रहा है, जिनकी आवाज की खनक हमेशा फिजाओं में गूंजती रहेगी।