Patna Protest: UGC बिल 2026 पर पटना में छात्रों का उबाल, सड़क पर किया ऐलान-ए-बग़ावत, पोस्टरों पर कालिख पोत कर सत्ता को दी सीधी चेतावनी

Patna Protest: पटना की फ़िज़ा में आज सियासत की गरमी और ग़ुस्से की तपिश साफ़ महसूस की गई, जब UGC बिल 2026 के ख़िलाफ़ ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन और स्वर्ण समाज एकता मंच के बैनर तले ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ....

UGC Bill 2026 sparks student fury in Patna posters blackened
UGC बिल 2026 पर पटना में छात्रों का उबाल- फोटो : reporter

Patna Protest: पटना की फ़िज़ा में आज सियासत की गरमी और ग़ुस्से की तपिश साफ़ महसूस की गई, जब UGC बिल 2026 के ख़िलाफ़ ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन और स्वर्ण समाज एकता मंच के बैनर तले ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ। हाथों में तख़्तियाँ, ज़ुबानों पर नारे और आंखों में आक्रोश लिए प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के पोस्टर पर कालिख पोतकर इस क़ानून को काला क़ानून क़रार दिया और फ़ौरन वापसी की मांग दोहराई।

प्रदर्शनकारियों का इल्ज़ाम है कि यह बिल तालीम की बराबरी के नाम पर बच्चों को जातीय खांचों में बांटने की साज़िश है। मंच से बोलते हुए उज्ज्वल कुमार ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता एक तरफ़ समानता का राग अलाप रही है, दूसरी तरफ़ तालीमी ढांचे में भेदभाव की बुनियाद रख रही है। उनका कहना था कि अगर वाक़ई बराबरी की नीयत होती, तो छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाला ऐसा क़ानून क्यों लाया जाता?

प्रदर्शन के दौरान साहित्य और प्रतीकों का सहारा लेते हुए वक्ताओं ने रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का ज़िक्र किया और अपनी पहचान व प्रतिरोध की भाषा को धार दी। भीड़ में कुछ बयान ऐसे भी सुनाई दिए, जिनमें आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी गई हालांकि आयोजकों ने इसे लोकतांत्रिक दबाव की रणनीति बताया।

इस बीच, सियासी गलियारों में बयानबाज़ी ने रफ़्तार पकड़ ली है। राजद और तेजप्रताप यादव ने खुले तौर पर UGC बिल का समर्थन कर चौंकाया है, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दलों की ख़ामोशी पर विपक्ष ने सवालों की बौछार कर दी है। विरोधी खेमा पूछ रहा है कि क्या सत्ता छात्रों की आशंकाओं का जवाब देगी या चुप्पी की आड़ में बिल को आगे बढ़ाया जाएगा?

पटना का यह प्रदर्शन महज़ एक धरना नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में शिक्षा नीति पर बड़े सियासी टकराव का इशारा माना जा रहा है। सवाल यही है क्या सरकार संवाद का रास्ता चुनेगी या सड़कों पर उबाल और तेज़ होगा?

रिपोर्ट- नरोत्तम कुमार सिंह