उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश बनेंगे मंत्री ! एमएलसी चुनाव में एनडीए उम्मीदवार बनाकर बड़ी सियासी तैयारी में भाजपा

बिहार में कुशवाहा वर्ग को साधने के लिए भाजपा एक बड़ा सियासी खेल उपेंद्र कुशवाहा के सहारे आगे बढ़ा सकती है जिसका बड़ा फायदा दीपक प्रकाश को मंत्री और एमएलसी के रूप में मिल सकता है.

Upendra Kushwaha /Deepak Prakash
Upendra Kushwahas /Deepak Prakash- फोटो : news4nation

Upendra Kushwaha : बिहार की सियासत में विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। लेकिन इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में उपेंद्र कुशवाहा और उनके बेटे दीपक प्रकाश बने हुए हैं। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट और जून में खाली हो रही 9 अन्य सीटों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग इन सभी सीटों पर एक साथ चुनाव करा सकता है। इसी संभावित चुनाव में दीपक प्रकाश की एंट्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं।


उपेंद्र कुशवाहा हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं, जबकि उनकी पत्नी स्नेहलता विधायक हैं। पहले नीतीश सरकार में कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाकर सबको चौंका दिया था, जबकि वे न तो विधायक थे और न ही एमएलसी। इस फैसले से उनकी पार्टी के भीतर भी नाराजगी देखने को मिली थी। उनके तीनों विधायकों के पार्टी से नाराजगी के संकेत मिले थे।


फिर से बन सकते हैं मंत्री 

अब बिहार में सत्ता समीकरण बदलने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि रालोमो (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) से मंत्री कौन बनेगा। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि दीपक प्रकाश को एक बार फिर मंत्री पद दिया जा सकता है। हालांकि, संवैधानिक नियमों के अनुसार किसी भी मंत्री को छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। चूंकि दीपक प्रकाश फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए अगर उन्हें दोबारा मंत्री बनाया जाता है तो उन्हें निर्धारित समय के भीतर चुनाव जीतना होगा। तय नियमों के अनुसार वे लगातार दो बार 6-6 महीने के लिए बिना किसी सदन के सदस्य रहे मंत्री बन सकते हैं। ऐसे में उनके दोबारा मंत्री बनने की संभावना है। 


भाजपा में रोलोमो का विलय 

सूत्रों की मानें तो भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा को उनकी पार्टी के विलय का प्रस्ताव भी दिया है, लेकिन अभी तक इस पर कोई सहमति नहीं बनी है। भाजपा की नजर कुशवाहा वोट बैंक पर है और वह इस समीकरण को मजबूत बनाए रखना चाहती है। इसी कारण सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के बाद उपेंद्र कुशवाहा के सहारे भी भाजपा इस वर्ग पर नजर बनाए हुए है। ऐसे में अगर उपेंद्र अपनी पार्टी का विलय नहीं भी करते हैं तो दीपक प्रकाश को आगामी एमएलसी चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है।


उपेंद्र कुशवाहा की बल्ले बल्ले 

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उपेंद्र कुशवाहा क्या फैसला लेते हैं और उनके बेटे दीपक प्रकाश का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाता है। लेकिन इन सबके बीच बिहार में कुशवाहा वोटरों को साधने की एक बड़ी पहल आगामी मंत्रिमंडल विस्तार, जो मई महीने में होने की संभावना है, में देखने को मिल सकती है। इसमें दीपक प्रकाश को बड़ा मंत्री पद के साथ ही एमएलसी का टिकट भी मिल सकता है। 


जदयू के लव-कुश पर नजर
दरअसल, बिहार की सियासत में नीतीश कुमार की मजबूत जमीनी पकड़ का एक बड़ा कारण कुर्मी-कुशवाहा जातियों पर उनकी पकड़ मानी जाती है, इसे सामान्य तौर पर लव-कुश समीकरण कहा जाता है। अब भाजपा इसी कुश के कुशवाहा वोटरों को साधने और अपने लिए मजबूत पकड़ बनाने की तैयारी में सम्राट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा के सहारे में बड़ी रणनीति बना सकती है। दोनों ही नेता कुशवाहा बिरदारी से आते हैं , ऐसे में इस जाति को एक खास संदेश देने की कोशिश भाजपा कर सकती है। इसमें अब दीपक प्रकाश को लेकर बड़ा दिल दिखाने की जुगत भी उसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।