Valentine Day Special : जो अल्फ़ाज़ न कह पाए, वो गुलाब कह देता है...रोज डे के साथ शुरू हुई 'वैलेंटाइन वीक' की शुरुआत
PATNA : फरवरी का महीना आते ही हवाओं में मोहब्बत की खुशबू घुलने लगती है और आज यानी 7 फरवरी से दुनिया भर में 'वेलेंटाइन वीक' का आगाज हो गया है। इस खास सप्ताह के पहले दिन को 'रोज डे' के रूप में मनाया जा रहा है। प्यार करने वालों के लिए यह दिन अपनी भावनाओं को शब्दों के बजाय फूलों के जरिए बयां करने का एक सुनहरा अवसर लेकर आया है, जिसे लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
दरअसल गुलाब प्रेम का प्रतीक है, सौंदर्य का सूचक है और खूबसूरती की सबसे मुकम्मल उपमा। यह सिर्फ़ एक फूल नहीं, बल्कि एहसासों की वह ज़ुबान है, जिसे हर दिल समझ लेता है। गुलाब आकर्षण का पर्याय है, नज़र जिस पर ठहर जाए, दिल वहीं उलझ जाए। उसकी पंखुड़ियाँ ग़ज़ल की तरह मुलायम हैं, उसकी खुशबू गीतों की माला-सी दिल के चारों ओर लिपट जाती है। रंगों में वह राजा-रानी की शान रखता है और गंध में ऐसी मादकता कि यादों में बस जाए। गुलाब जीवन का सबसे खूबसूरत रंग है—जो जीते जी दिलों को सजाता है और मरने के बाद भी कब्रों को महकाता है। शायद यही वजह है कि गुलाब समय और मृत्यु—दोनों से आगे निकल जाता है। काँटों के बीच खिलकर वह सिखाता है कि इश्क़ आसान नहीं, पर खूबसूरत ज़रूर होता है। तभी तो कहा गया है की
काँटों से घिरा होकर भी मुस्कुराता है गुलाब,
इश्क़ की हर सख़्ती को हरा जाता है गुलाब।
वेलेंटाइन की शुरुआत गुलाब से इसलिए होती है क्योंकि प्रेम की पहली भाषा इशारा होती है—और गुलाब सबसे ख़ामोश, सबसे असरदार इशारा है। एक गुलाब कह देता है—“तुम ख़ास हो।” यह स्वीकारोक्ति है, प्रस्ताव है, और वादा भी। लाल गुलाब इश्क़ की आग है, गुलाबी नज़ाकत, सफ़ेद पवित्रता और पीला दोस्ती की धूप।
न रंग पूछो, न खुशबू का हिसाब पूछो,
दिल पर जो उतर जाए, वही गुलाब पूछो।
इसीलिए वेलेंटाइन गुलाब से शुरू होता है—क्योंकि इश्क़ की हर कहानी की पहली पंक्ति गुलाब ही लिखता है।
जो अल्फ़ाज़ न कह पाए, वो गुलाब कह देता है,
इश्क़ जब शर्माए, तो गुलाब आगे बढ़ता है।