Holi 2026: हृदय में बसें कोसलपुर के राजा तो हर विष बने अमृत, पढ़िए होली पर आत्मा को रंगने का दिव्य संदेश
Holi 2026:आज होली है..जीवन को एक नए रंग में रंगने का समय अब आ गया है। आज से एक नई शुरुआत हर कीमत पर कीजिए।...
Holi 2026: “प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥”
आज होली है सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि रूह को पाक करने, नियत को साफ़ करने और जिंदगी को नए रंग में रंगने का मुक़द्दस दिन। फागुन की इस पावन घड़ी में आइए, हम अपने दिल के दरवाज़े खोलें और अयोध्या के राजा श्री सीताराम को उसमें हमेशा के लिए बसा लें। जब दिल में राम का नूर उतर आता है, तब हालात की स्याही भी रोशनी में बदल जाती है।
जब मन में भरोसा और ज़ुबान पर “सीताराम” हो, तो ज़हर भी अमृत बन जाता है यानी मुश्किलात आसान हो जाती हैं। दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं रंजिशें मोहब्बत में तब्दील हो जाती हैं। समुद्र, जो असंभव का प्रतीक है, गाय के खुर के बराबर छोटा लगने लगता है—यानी बड़ी से बड़ी रुकावट भी मामूली हो जाती है। और आग, जो संकट का संकेत है, शीतल हो जाती है हर भय शांत पड़ जाता है।
होली का असली रंग बाहरी नहीं, भीतरी होता है। जब आत्मा भक्ति के गुलाल से रंगी हो, जब कर्म सत्पथ पर हों और इरादा नेक हो, तभी जीवन का कायाकल्प होता है। आज से एक नई शुरुआत कीजिए। कटुता, द्वेष और अहंकार की होलिका जलाइए और प्रेम, करुणा व सत्य के रंग से अपने जीवन को सजाइए।
हनुमान जब लंका में प्रवेश करते हैं, तो उनके हृदय में केवल राम का नाम था। वही नाम उन्हें निर्भय बनाता है, वही स्मरण उन्हें असंभव को संभव करने की ताक़त देता है। दिल में राम हों तो हर मुश्किल काम तमाम हो जाता है।
इस पावन दिन पर प्रण कीजिए सत्कर्म के पथ पर चलेंगे, सत्य को जीवन का आधार बनाएंगे और हर हाल में प्रभु का स्मरण रखेंगे। क्योंकि जब हृदय में कोसलपुर के राजा बसते हैं, तब जीवन खुद एक दिव्य उत्सव बन जाता है।
कौशलेंद्र प्रियदर्शी की कलम से....