पटना हाईकोर्ट में कब मिलेगा हाई-स्पीड Wi-Fi, मामला अटका-इंतजार बढ़ा, इस दिन होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट परिसर में बिना किसी रूकावट के इन्टरनेट और वाई-फाई कनेक्टिविटी होनी चाहिए, जिससे न्यायिक कार्य मे बाधा उत्पन्न नहीं हो। इसे लेकर 23 जुलाई को अहम सुनवाई होगी.

high-speed Wi-Fi in Patna High Court
high-speed Wi-Fi in Patna High Court - फोटो : news4nation

Patna High Court  : पटना हाईकोर्ट परिसर में और कोर्ट रूम में समयबद्ध ढंग से उच्च गति इन्टरनेट कनेक्टिविटी, जिसमें वाई-फाई की सुविधा शामिल हो, के उपलब्ध कराए जाने के मामलें पर सुनवाई 23 जुलाई, 2026 तक टल गई। इस जनहित याचिका की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस  सुधीर सिंह की खंडपीठ कर रही हैं। अब इस  जनहित याचिका की सुनवाई 23 जुलाई, 2026  को होगी ।


इससे पूर्व की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, सीपीसी को बुलाया। कोर्ट ने जानना चाहा कि अबतक क्या कार्रवाई हुई है।कोर्ट  ने न्यू वेल्डिंग  में इन्टरनेट  सुविधा प्रदान करने हेतु मोबाइल टावर लगाने का आदेश सम्बन्धित रजिस्ट्रार को दिया। कोर्ट ने पूर्व  में इस मामलें पर  याचिकाकर्ता की शिकायत को त्वरित कार्रवाई के लिए बुनियादी ढांचागत समिति के समक्ष भेज दिया और समिति से अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।


अधिवक्ता ओमप्रकाश ने पटना हाईकोर्ट परिसर में  हाई स्पीड इन्टरनेट और वाई-फाई  लगाने के लिए एक जनहित याचिका दायर की थी।कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट प्रशासन से जबावतलब करते हुए ये बताने को कहा अब तक इस मामलें पर क्या कार्रवाई हुई है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता ओम प्रकाश को बीएसएनएल और बेलटरान को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता अधिवक्ता ओमप्रकाश का कहना था कि हाईकोर्ट परिसर  में प्रभावी  और तेजपुर गति का इन्टरनेट और वाई-फाई की सुविधा होनी चाहिए।  


उन्होने कहा था कि पटना हाईकोर्ट परिसर  में बिना किसी रूकावट  के इन्टरनेट और वाई-फाई  कनेक्टिविटी  होनी चाहिए, जिससे न्यायिक कार्य मे  बाधा उत्पन्न  नहीं  हो।अधिवक्तागण अपने न्यायिक कार्य सुचारू ढंग से कर सके। उन्होंने बताया कि पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट्स एसोसिएशन ने अपने अधिवक्ता सदस्यों के सीमित वाई-फाई सुविधा प्रदान किया था।


डिजिटल न्यायिक सेवा प्रभावी रूप से कार्य करना आवश्यक है,तभी कोर्ट में तीव्र गति और कम समय में न्याय मिल सकेगा।संविधान के मौलिक अधिकार 19 और 21 धाराएं तभी सही मायनों कार्य  कर  पाएगी।