Bihar Politics: नीतीश युग का अंत! नीतीश के बाद कौन बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री,इन चेहरों की हो रही चर्चा

नीतीश के संभावित इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार की कमान किसके हाथ में होगी।

Who will become the CM of Bihar after Nitish
नीतीश के बाद कौन बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत आज ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। पिछले साल नवंबर में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने अपनी पारी समेटने की घोषणा कर दी है। खराब स्वास्थ्य और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के चलते वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख करेंगे।अपने ट्वीट में नीतीश कुमार ने लिखा कि पिछले दो दशक से अधिक समय से जनता ने मुझ पर विश्वास और समर्थन बनाए रखा। “नीतीश कुमार आज विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को पटना पहुंच सकते हैं, जहां वे भाजपा अध्यक्ष नीतीन नवीन के नामांकन में शामिल होंगे।

नीतीश के संभावित इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार की कमान किसके हाथ में होगी। इस दौड़ में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने का अनुमान लग रहा है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यनंद राय ‘डार्क हॉर्स’ के तौर पर उभर सकते हैं। वहीं, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के नाम भी चर्चा में हैं। इसके अलावा भाजपा विधायक दिलीप जायसवाल और संजीव चौरसिया का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में लिया जा रहा है। हालाकि राजनीतिक विशलेषकों का कहना है कि भाजपा किसे सीएम बनाएगी इसकी आकलन करना मुश्कील है। भाजपा अंत में अपने पत्ते खोलती है।

जेडीयू के कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है, जिनमें उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और नीतीश के पुत्र निशांत कुमार का नाम चर्चा में है। विजय चौधरी ने संकेत दिया कि कार्यकर्ता चाहते हैं कि निशांत जल्द ही राजनीति में सक्रिय हों।विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की राजनीति में एक युग का अंत होगा और नए समीकरणों की शुरुआत होगी। पिछले चुनाव में उनकी लोकप्रियता और विकास पुरुष की छवि ने एनडीए को 243 में से 202 सीटें दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब बिहार की सियासी बिसात नए खेल और नए चेहरे के साथ गढ़ी जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम महज संसदीय विस्तार का नहीं है, बल्कि बिहार में सत्ता संरचना और नेतृत्व के पुनर्संतुलन की प्रक्रिया का संकेत है। आने वाले महीनों में भाजपा और जदयू के बीच सत्ता के नए समीकरण उभर सकते हैं, और मुख्यमंत्री पद के लिए संभावित उत्तराधिकारी पर सियासी गहन चर्चाएं शुरू हो जाएंगी।