Bihar Crime:आवास योजना में बड़ा खेल? 1500 नामों पर सवाल, 3-5 हजार की कथित वसूली का आरोप!

Bihar Crime: बिहार के सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड की हाटी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी सूची को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है।...

Saharsa Housing Scheme

Bihar Crime: बिहार के सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड की हाटी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी सूची को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। सूची में कथित अनियमितताओं और बिचौलियों के जरिए पैसे की मांग किए जाने के आरोपों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सूची में ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो पहले आवास योजना का लाभ ले चुके हैं। वहीं, पक्के मकान में रहने वाले कुछ लोगों के नाम भी सूची में दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी।

1500 लाभार्थियों की सूची पर सवाल, पात्रता जांचने की उठी मांग

जानकारी के मुताबिक, हाटी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करीब 1500 लाभार्थियों के नाम सूची में दर्ज होने की बात कही जा रही है। इनमें से कुछ नामों की पात्रता और वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि सूची में शामिल लगभग 75 प्रतिशत नामों की जांच की जरूरत है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाभार्थियों का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया? क्या सूची तैयार करने से पहले पात्रता का सही तरीके से सत्यापन हुआ? यदि किसी परिवार को पहले ही योजना का लाभ मिल चुका है, तो उसका नाम दोबारा सूची में शामिल होने की शिकायत की जांच कैसे होगी?इन सवालों के जवाब के लिए लाभार्थियों के दस्तावेजों, आवास की वास्तविक स्थिति और पूर्व में मिले सरकारी लाभ का सत्यापन जरूरी है।

तीन से पांच हजार रुपये की कथित वसूली, PhonePe लेनदेन की जांच की मांग

इस मामले में कथित अवैध वसूली के आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि पूर्व में कुछ लाभुकों से प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में नाम जुड़वाने के नाम पर तीन से पांच हजार रुपये तक की मांग की गई या रकम वसूली गई।यह भी दावा किया जा रहा है कि कथित बिचौलियों के माध्यम से PhonePe पर पैसे लिए जाते थे। इस सिलसिले में संबंधित फोन-पे लेनदेन की जांच कराने की मांग उठ रही है। हालांकि, फिलहाल इन आरोपों के समर्थन में किसी स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्य की जानकारी सामने नहीं आई है।यदि जांच में अवैध वसूली की पुष्टि होती है, तो यह जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों के साथ गंभीर अन्याय होगा। ऐसे में कथित लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच अहम मानी जा रही है।

आवास सहायक फैजल खान से संपर्क की कोशिश, आधिकारिक पक्ष का इंतजार

मामले की पड़ताल और संबंधित पक्ष का बयान लेने के लिए News4Nation ने हाटी पंचायत के आवास सहायक फैजल खान से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। बातचीत में योजना से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। उनका आरोप है कि बातचीत के दौरान एक कथित बिचौलिये से बात कराई गई। रिपोर्टर ने यह भी दावा किया कि बातचीत के दौरान पत्रकार से बात करने की जरूरत नहीं होने संबंधी टिप्पणी की गई।हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर आवास सहायक फैजल खान का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। उनका पक्ष मिलने के बाद उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि मामले के सभी पहलू सामने आ सकें।

एसडीओ और बीडीओ के संज्ञान में मामला लाने का दावा

मामले को सहरसा सदर के अनुमंडल पदाधिकारी श्रीयांश तिवारी और नवहट्टा की प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रिया भारती के संज्ञान में लाया गया है। उनसे लाभार्थी सूची की जांच कराने का अनुरोध किए जाने की बात कही गई है।अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। जरूरत है कि सूची में शामिल लाभार्थियों की पात्रता, पूर्व में आवास योजना का लाभ मिलने की स्थिति और कथित अवैध वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

क्या हाटी पंचायत की लाभार्थी सूची का दोबारा सत्यापन कराया जाएगा?क्या पूर्व में आवास योजना का लाभ ले चुके लोगों के नामों की जांच होगी?क्या पक्के मकान में रहने वाले कथित अपात्र लाभार्थियों की पात्रता की समीक्षा की जाएगी?क्या तीन से पांच हजार रुपये की कथित वसूली और PhonePe लेनदेन की जांच होगी?यदि अनियमितता या अवैध वसूली की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?

फिलहाल, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगा कि लाभार्थी सूची में कोई गड़बड़ी हुई है या नहीं और कथित वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है। सबसे अहम बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित हो, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

रिपोर्टर- छोटू सरकार