कौन है लाला बाबू जिन्होंने बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री के लिए छोड़ दी थी अपनी विधानसभा सीट, 124वीं जयंती पर श्रद्धा और सम्मान के साथ किए गए याद
Lala Babu Jayanti: बरबीघा के श्री कृष्ण राम रुचि कॉलेज में बिहार दधीचि कहे जाने वाले लाला बाबू की 124वीं जयंती भव्य समारोह के साथ मनाई गई।
Lala Babu Jayanti: बरबीघा के श्री कृष्ण राम रुचि कॉलेज में बिहार दधीचि कहे जाने वाले कृष्ण मोहन प्यारे सिंह उर्फ लाला बाबू की 124वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई।वे बरबीघा विधानसभा के पहले विधायक और महान शिक्षाविद थे। रविवार (4 जनवरी 2026) को आयोजित जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुंगेर विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ घनश्याम राय जबकि विशिष्ट अतिथि IMA के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर सहजानंद प्रसाद सिंह और जेआरएस कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर देवराज सुमन शामिल हुए।वही मुख्य वक्ता के रूप में डॉक्टर भावेश चंद्र पांडे, समाजवादी नेता शिवकुमार, कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर सुधीर मोहन शर्मा, डॉ (प्रो०) रामविलास सिंह शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर और लाला बाबू की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर की गई। कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर (प्रोफेसर) संजय कुमार के द्वारा अतिथियों को मोमेंटो अंगवस्त्र और गुलदस्ता देकर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर कार्यक्रम में शामिल हुए सभी शैक्षिणिक और गैर शैक्षिणिक कर्मियों को भी मुंगेर विश्वविद्यालय के रजिस्टर द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता ने लाला बाबू की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने जीवन भर समाज सेवा को अपना प्रथम कर्तव्य माना था।
आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया
लाला बाबू स्वतंत्रता के आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिए और अंग्रेजों के दांत खट्टे किए। उन्होंने बहुत सारे शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना की जिसमें आरडी कॉलेज शेखपुरा, केकेस कॉलेज जमुई, केकेएस कॉलेज लखीसराय, बरबीघा उच्च विद्यालय, उच्च विद्यालय कटारी, उच्च विद्यालय मालदह, उच्च विद्यालय बभनबीघा आदि प्रमुख संस्थान शामिल है। उनके द्वारा समाज में शिक्षा के माध्यम से लाई गई क्रांति का लोग आज भी लोहा मानते हैं। वहीं समाजवादी नेता शिवकुमार ने कहा कि मैं परम सौभाग्यशाली हूं कि मुझे बचपन में उनके सानिध्य में जन सेवा करने और सीखने का अवसर प्राप्त हुआ था। राजनीति में साम दाम दंड भेद अपनाकर आगे बढ़ाने की भावना से उलट लाला बाबू एक राजनीतिज्ञ के रूप में भी आदर्श हैं।
बरबीघा से पहले विधायक
बरबीघा से पहले विधायक होते हुए भी उन्होंने बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ श्री कृष्ण सिंह के लिए बरबीघा विधानसभा की सीट छोड़ दी थी।यही नहीं उन्हें जिताकर पुनः बिहार का मुख्यमंत्री बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके मन में किसी प्रकार का जातीय भेदभाव आदि नहीं। मैं अपने वेतन की राशि को भी गरीब मेंधाबी बच्चों के बीच खर्च कर दिया करते थे। अपनी सारी संपत्ति तक को अपने भाई के नाम कर दी थी। कार्यक्रम में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए उन्हें सदी का महान नेता और समाज सेवक बताया।
प्राचार्य डॉ संजय प्रसाद के कार्यों की प्रशंसा
इस अवसर पर कॉलेज को बेहतर दिशा में ले जाने के लिए प्रयासरत नवनियुक्त प्राचार्य डॉ संजय प्रसाद के कार्यों की भी खूब प्रशंसा की गई। कार्यक्रम में शामिल एसपी डॉक्टर राकेश कुमार ने भी जिले के लोगों से ऐसे महान महान धरोहर को सुसज्जित और जीवंत बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम के समन्वयक प्रोफेसर डॉक्टर वीरेंद्र पांडे रहे जबकि मंच संचालन का कार्य डॉक्टर विद्या प्रकाश मौर्य ने किया। इस अवसर पर रेफरल अस्पताल बरबीघा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर फैजल अरशद, पूर्व सिविल सर्जन डॉक्टर कृष्ण मुरारी प्रसाद सिंह, कॉलेज के शैक्षणिक कर्मी में संतोष कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
लाला बाबू चौक मूर्ति का हुआ अनावरण
इस अवसर पर नगर परिषद बरबीघा क्षेत्र के थाना के समीप लाल बाबू की मूर्ति का अनावरण भी किया गया। बरबीघा में यह जगह अब थाना चौक नहीं बल्कि लाला बाबू चौक के नाम से जाना जाएगा। मूर्ति का अनावरण नगर परिषद अध्यक्ष सोनू कुमार सहित अन्य सामाजिक गण्यमान्य लोगों द्वारा फीता काट कर किया गया।इस अवसर ओर केक भी काटी गई। बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी के पहल पर नगर परिषद द्वारा यह प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा स्थापित होने के बाद बरबीघा के लोगों के साथ-साथ लाला बाबू के पैतृक गांव में भी खुशी देखी गई।वही लाला बाबू के पैतृक गांव तेउस के उच्च विद्यालय में भी पूर्व की भांति भव्य कार्यक्रम का आयोजित करने श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में बरबीघा के वर्तमान जदयू विधायक कुमार पुष्पांजय शामिल हुए।