‘रिपोर्ट देख टेंशन, कहाँ गई पेंशन?’, शिवहर में 93 साल की बबुनी देवी को फाइलों में मार डाला, पेंशन के लिए दर-दर भटक रही महिला, डीएम ने दिए जांच के आदेश

‘रिपोर्ट देख टेंशन, कहाँ गई पेंशन?’, शिवहर में 93 साल की बबु

SHEOHAR : रिपोर्ट देख टेंशन, कहाँ गई पेंशन?" यह सवाल आज शिवहर जिले की एक बेबस बुजुर्ग महिला प्रशासन से पूछ रही है। जिले के पुरनहिया प्रखंड अंतर्गत बाखर चंडीहा पंचायत में एक ऐसी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है, जिसने व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ पंचायत सचिव की एक गलत रिपोर्ट ने 93 वर्षीय जीवित महिला बबुनी देवी को सरकारी दस्तावेजों में 'मृत' घोषित कर दिया है, जिसके कारण उनकी वृद्धावस्था पेंशन पिछले कई महीनों से बंद है।

पंचायत सचिव की रिपोर्ट ने बढ़ाई 'टेंशन'

मामला बाखर चंडीहा पंचायत के वार्ड नंबर 11 का है। बबुनी देवी (पति: राम विनोद सिंह) की उम्र 93 वर्ष है। पंचायत सचिव द्वारा भेजी गई कथित गलत जांच रिपोर्ट में उन्हें मृत दिखा दिया गया। जब पेंशन की राशि खाते में आना बंद हुई, तब परिजनों को इस सच्चाई का पता चला। वृद्ध महिला खुद गुहार लगा रही हैं कि वे जीवित हैं, लेकिन सरकारी फाइलों ने उन्हें 'स्वर्गवासी' मान लिया है। उम्र के इस पड़ाव पर पेंशन बंद होने से उनके सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है।

जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान: "लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी"

इस गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही शिवहर की जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने कड़ा रुख अपनाया है। डीएम ने बताया कि उन्हें इस प्रकरण की शिकायत मिल चुकी है और उन्होंने इसे गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मामले की विधिवत जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि रिपोर्ट गलत पाई जाती है, तो तत्काल सरकारी अभिलेखों में सुधार कर बबुनी देवी की पेंशन पुनः शुरू कराई जाएगी और पिछली रुकी हुई राशि का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाएगा।

दोषी कर्मियों पर गिरेगी गाज

डीएम प्रतिभा रानी ने कड़े लहजे में कहा कि इस तरह की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जांच के आदेश देते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर या लापरवाही में गलत रिपोर्टिंग की गई है, तो संबंधित पंचायत सचिव या अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

यह मामला उजागर होने के बाद पंचायत स्तर पर होने वाली भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि बिना जीवित व्यक्ति को देखे या बिना पुख्ता प्रमाण के उसे मृत कैसे घोषित किया जा सकता है? हालांकि, जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

मनोज कुमार की रिपोर्ट