AK-47 की गूंज से कांपा लोकतंत्र! क्या छात्र आतंकवादी थे, जो उन पर चली असॉल्ट राइफल? छीछालेदर के बाद जवान निलंबित
सड़क पर अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे छात्रों और बंद समर्थकों के बीच अचानक AK-47 से फायरिंग की तस्वीरें सामने आईं तो सियासी गलियारों से लेकर आम अवाम तक में सनसनी फैल गई।
Siwan Police: बिहार बंद के दौरान सीवान में जो मंजर सामने आया, उसने कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे छात्रों और बंद समर्थकों के बीच अचानक AK-47 से फायरिंग की तस्वीरें सामने आईं तो सियासी गलियारों से लेकर आम अवाम तक में सनसनी फैल गई। लोग पूछ रहे हैं-क्या ये छात्र आतंकवादी थे, जो उन पर AK-47 तान दी गई? तान हीं नहीं दी गई वरन दनादन फायरिंग भी की गई।तीन छात्रों को गोली गली थी, छात्र मौत से संघर्ष कर रहे हैं।
25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान सीवान में तैनात एक पुलिस जवान की AK-47 से फायरिंग करते हुए तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। तस्वीरों के वायरल होने के बाद पुलिस महकमे की जमकर किरकिरी हुई। चारों तरफ छीछालेदर होने लगी तो आखिरकार जांच के बाद संबंधित जवान को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसे पुलिस की अपनी भद पिटने के बाद नुकसान नियंत्रण की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
इस पूरे मामले को विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जोर-शोर से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को अपराधियों की तरह कुचलने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि जब सीवान पुलिस लोकतांत्रिक आवाजों को बंदूक की नली से जवाब दिया जाएगा, तब लोकतंत्र का जनाज़ा ही निकलेगा। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन खत्म होने के बाद भी छात्रों को जेल भेजा जा रहा है, हजारों युवाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है मानो वे कोई संगीन जुर्म के मुल्ज़िम हों। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उधर, विपक्ष अब इस पूरे घटनाक्रम को नीट पेपर लीक आंदोलन और छात्रों पर कथित पुलिसिया बर्बरता से जोड़कर केंद्र और राज्य सरकार पर सियासी दबाव बढ़ाने की तैयारी में है। विपक्ष का आरोप है कि दिल्ली से लेकर बिहार तक छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गन और सख्त पुलिस कार्रवाई का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र घायल हुए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भीड़ नियंत्रण के लिए AK-47 जैसी असॉल्ट राइफल का प्रदर्शन या इस्तेमाल उचित था? इस मामले में तथ्यों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि फायरिंग किस परिस्थिति में हुई, क्या गोली चलाई गई, किस प्रकार के बल प्रयोग की अनुमति थी, और क्या स्थापित पुलिस प्रक्रियाओं का पालन किया गया। यही सवाल आज सियासत के केंद्र में है और इन्हीं जवाबों का इंतजार पूरा बिहार कर रहा है।