कोसी में मानसून से पहले महा-तैयारी : भारत-नेपाल की जेएफसीसी टीम ने किया तटबंधों का निरीक्षण, बराज के सभी 56 गेटों की जांच

Bihar News : कोसी क्षेत्र में आसन्न बाढ़ के खतरे से निपटने और सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता करने के लिए भारत और नेपाल के जल संसाधन विभाग के उच्चाधिकारियों ने एक संयुक्त मोर्चा संभाला है। दोनो देशों के तकनीकी टीम ने संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण किया...

कोसी में मानसून से पहले महा-तैयारी : भारत-नेपाल की जेएफसीसी
कोसी में मानसून से पहले महा-तैयारी - फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : उत्तर बिहार के शोक कहे जाने वाले कोसी क्षेत्र में मानसून की आहट और 1 जून से शुरू होने वाली बाढ़ अवधि को देखते हुए सरकारी मशीनरी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। आसन्न बाढ़ के खतरे से निपटने और सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता करने के लिए भारत और नेपाल के जल संसाधन विभाग के उच्चाधिकारियों ने एक संयुक्त मोर्चा संभाला है। दोनों देशों की तकनीकी टीम ने कोसी तटबंधों, बराज और अत्यधिक कटाव प्रभावित संवेदनशील इलाकों का मैराथन निरीक्षण कर सुरक्षा तैयारियों का जमीनी आकलन किया।


इस हाई-प्रोफाइल दौरानी कार्रवाई के तहत जेएफसीसी (जॉइंट फ्लड कोऑर्डिनेशन कमिटी) की उच्च स्तरीय टीम ने बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण विभाग के अभियंताओं के साथ नेपाल और भारतीय सीमा के भीतर आने वाले कई संवेदनशील स्थलों का सघन दौरा किया। अधिकारियों ने विशेष रूप से वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत स्वीकृत किए गए बाढ़ पूर्व सुरक्षा (Anti-Erosion) कार्यों की गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति का जायजा लेते हुए मौके पर ही तकनीकी जांच की।


40 करोड़ की लागत से अभेद्य हुए तटबंध

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष कोसी क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए करीब 40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है। इसके तहत नेपाल प्रभाग के 29 और भारतीय क्षेत्र के 21 अति-संवेदनशील स्थानों पर तटबंध सुरक्षा, कटाव निरोधक कार्य और स्पर (Spur) निर्माण से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स चलाए गए हैं। निरीक्षण के दौरान जेएफसीसी की टीम ने नेपाल प्रभाग के अंतर्गत आने वाले 26.44 किलोमीटर लंबे हिस्से में तैयार किए गए संरचनात्मक सुरक्षा कार्यों और अत्याधुनिक परकोपाइन सिस्टम की कार्यक्षमता को परखा।


परकोपाइन सिस्टम की हुई जांच

तटबंधों की सुरक्षा जांचने के बाद अधिकारियों का यह काफिला सीधे ऐतिहासिक कोसी बराज पहुंचा। बराज पर सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले सभी 56 फाटकों (Gates) की तकनीकी स्थिति की बारीकी से समीक्षा की गई। बाढ़ के चरम समय में गेटों के संचालन में किसी भी प्रकार की यांत्रिक या तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए भारी मशीनों, हाइड्रोलिक सिस्टम और ऑपरेटिंग बैकअप की गहनता से टेस्टिंग की गई।


पायलट चैनल से कम होगा तटबंधों पर दबाव

इसी क्रम में अधिकारियों ने लगभग 3.04 करोड़ रुपये की लागत से हाल ही में तैयार किए गए 'सेंट्रल पायलट चैनल' का मोटर बोट के जरिए ऑन-स्पॉट निरीक्षण किया। तकनीकी विशेषज्ञों ने टीम को बताया कि यह चैनल कोसी नदी की मुख्य धारा को बीच में केंद्रित रखने में बेहद कारगर साबित हो रहा है। इसके माध्यम से नदी के बीच सालों से जमा गाद (Silt) धीरे-धीरे स्वतः हट रही है, जिससे बाढ़ के दौरान पानी का सीधा और तीव्र दबाव मुख्य तटबंधों तथा स्परों पर काफी कम हो जाएगा और तबाही का खतरा टल सकेगा।


कंट्रोल रूम में हुई हाई-लेवल मीटिंग

निरीक्षण के इस महा-अभियान के बाद कोसी बराज स्थित मुख्य कंट्रोल रूम में एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस रणनीतिक बैठक में केंद्रीय जल आयोग (CWC), केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (CPRI) पुणे, बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग और नेपाल सरकार के शीर्ष प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में बाढ़ के दौरान अचानक उत्पन्न होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने, रियल-टाइम सूचनाओं के आदान-प्रदान और बराज गेटों के सुचारू संचालन की तकनीकी व्यवस्था पर विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया गया।


बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण विभाग के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) संजीव शैलेश ने तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कोसी क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े अधिकांश क्रिटिकल कार्य शत-प्रतिशत पूरे कर लिए गए हैं और 1 जून की समय-सीमा से पहले सभी बचे-खुचे इंतजामों को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा ताकि तटबंध के भीतर और बाहर रहने वाली आबादी पूरी तरह सुरक्षित रहे।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट