आधी रात को छापेमारी और फिर पूरे शहर में फैला कचरा : पुलिस की एक कार्रवाई ने कैसे थाम दी नगर परिषद की रफ्तार?

पौल में सफाईकर्मियों और पुलिस के बीच आर-पार की जंग! एक नाले के विवाद ने कैसे पूरे शहर की सूरत बिगाड़ दी, जानिए पूरी कहानी।

आधी रात को छापेमारी और फिर पूरे शहर में फैला कचरा : पुलिस की

Supaul - सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब रविवार को सुपौल के वार्ड संख्या 22 में नाला खुदाई का काम शुरू हुआ। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि एक मामूली विवाद पूरे शहर की सफाई व्यवस्था को बंधक बना लेगा। आरोप है कि काम के दौरान अबू बकर नामक युवक ने न सिर्फ जेसीबी चालक के साथ मारपीट की, बल्कि जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर माहौल तनावपूर्ण कर दिया।

थाने की चौखट पर जब 'इंसाफ' की जगह मिला 'इंतजार' 

घटना से आहत नगर परिषद के कर्मचारी जब अपनी फरियाद लेकर एससी-एसटी थाने पहुंचे, तो वहां का मंजर कुछ और ही था। कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस उनकी शिकायत सुनने के बजाय आनाकानी करने लगी। सिस्टम की इस बेरुखी से नाराज सफाईकर्मियों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने विरोध स्वरूप थाने के मुख्य गेट पर ही कचरा फेंक कर अपनी नाराजगी जाहिर की।

आधी रात की छापेमारी और 'प्रदेश महासचिव' की गिरफ्तारी 

कचरा फेंकने की घटना ने आग में घी का काम किया। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बिहार लोकल बॉडीज एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव और नगर परिषद के क्लर्क असजद आलम के घर पर दबिश दी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने न सिर्फ छापेमारी की बल्कि मारपीट करते हुए असजद आलम समेत 5 लोगों को हिरासत में ले लिया।

सड़कों पर कचरा और सफाईकर्मियों का 'अल्टीमेटम' 

अपने नेता और साथियों की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही सुपौल नगर परिषद के तमाम सफाईकर्मी काम छोड़कर हड़ताल पर चले गए हैं। शहर के चौराहों पर कचरे का अंबार लगने लगा है और दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। सफाईकर्मियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनके साथियों की रिहाई नहीं होती, झाड़ू नहीं उठेगी।

एसपी से न्याय की गुहार और बढ़ता तनाव 

अब यह मामला पूरी तरह पुलिस प्रशासन बनाम नगर परिषद कर्मचारी बन चुका है। सफाईकर्मी अब सीधे जिले के कप्तान (SP) से गुहार लगा रहे हैं कि संबंधित थानाध्यक्ष और एक सब इंस्पेक्टर पर सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल सुपौल की गलियों में सन्नाटा तो है, लेकिन कचरे के ढेर और पुलिस की गश्त एक बड़े प्रशासनिक संकट की गवाही दे रहे हैं।

Report - Vinay kumar mishra