सावधान! कहीं आपका आधार कार्ड भी तो फर्जी नहीं?': यहां चल रहा था 'नकली दस्तावेजों का कारखाना, बिहार से सारण तक जुड़े तस्करों के तार
सुपौल में पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। गिरोह के तार सारण से जुड़े हैं और 1250 से ज्यादा सक्रिय आईडी का पता चला है।
Supaul - : बिहार के सुपौल जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने जिला प्रशासन और आम जनता की नींद उड़ा दी है। साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो आपकी पहचान से खिलवाड़ कर रहा था। पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज बनाने वाले तीन शातिर गुर्गों को गिरफ्तार किया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
गुप्त सूचना पर 'छोटू आधार सेंटर' में छापेमारी
यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक शरथ आरएस के निर्देश पर की गई। 9 अप्रैल 2026 को पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी कि बसबिट्टी चौक स्थित “छोटू आधार सेंटर” की आड़ में काले खेल को अंजाम दिया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने जाल बिछाया और उक्त केंद्र पर अचानक छापेमारी कर दी। मौके से पुलिस ने दो युवकों—बाबुल कुमार गुप्ता (23 वर्ष) और मुकेश पासवान (30 वर्ष) को धर दबोचा। तलाशी के दौरान केंद्र से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं।
सॉफ्टवेयर को 'बायपास' कर बनाते थे नकली पहचान
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ये आरोपी ECMP आधार सॉफ्टवेयर को अवैध तरीके से 'बायपास' कर फर्जी आधार कार्ड तैयार कर रहे थे। इसके लिए वे एक विशेष वेबसाइट का सहारा लेते थे, जिसके जरिए वे किसी का भी फर्जी आवासीय प्रमाण पत्र बना देते थे। इस फर्जीवाड़े के जरिए कोई भी बाहरी व्यक्ति या अपराधी आसानी से बिहार का निवासी बन सकता था, जो सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ा खतरा है।
सारण से जुड़ा है इस गिरोह का मास्टरमाइंड
सुपौल पुलिस की जांच यहीं नहीं रुकी। पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल और दस्तावेजों को खंगालने पर इस गिरोह के मास्टरमाइंड का पता चला। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से अवैध वेबसाइट संचालित करने वाले पप्पू कुमार को सारण जिले के मकेर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि पप्पू की वेबसाइट पर 1250 से अधिक यूजर अकाउंट सक्रिय थे, यानी यह गिरोह केवल सुपौल तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके पैर पूरे बिहार में फैले हुए हैं।
भारी मात्रा में उपकरण और 50 सिम कार्ड बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 'मिनी डेटा सेंटर' जैसा नजारा देखा। पुलिस ने मौके से 6 लैपटॉप, 4 फिंगरप्रिंट स्कैनर, 4 आइरिस स्कैनर (आंखों को स्कैन करने वाला डिवाइस), 2 जीपीएस डिवाइस, 3 कैमरा, 8 मोबाइल फोन और करीब 50 फर्जी सिम कार्ड जब्त किए हैं। इन सामानों की बरामदगी इस बात का सबूत है कि यह गिरोह कितने बड़े पैमाने पर डेटा चोरी और फर्जीवाड़ा कर रहा था।
पुलिस की अपील: केवल अधिकृत केंद्रों पर ही जाएं
तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस अब उन 1250 सक्रिय यूजर्स की तलाश कर रही है जो इस वेबसाइट का उपयोग कर रहे थे। सुपौल पुलिस ने आम जनता को सचेत करते हुए कहा है कि अपना आधार या पैन कार्ड बनवाने के लिए केवल सरकारी या अधिकृत केंद्रों पर ही जाएं। किसी भी प्राइवेट या संदिग्ध सेंटर पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें, वरना आप भी साइबर ठगी या कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं।