सुपौल सदर अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत : परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का लगाया आरोप, सिविल सर्जन से जांच की मांग
सुपौल जिले के सदर अस्पताल पर बड़ा आरोप लगा है। एक 60 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही और गलत इलाज का आरोप लगाते हुए सिविल सर्जन से जांच की मांग की है...
Supaul : जिले के सदर अस्पताल में इलाज के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही के कारण 60 वर्षीय एक महिला की मौत का मामला प्रकाश में आया है। मृतका की पहचान सदर थाना क्षेत्र के चेनसिंहपट्टी, वार्ड संख्या-07 निवासी मेहरूण निशा के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान महिला को गलत दवा दी गई और उनकी हालत गंभीर होने के बावजूद उनके चेहरे से ऑक्सीजन हटा ली गई, जिससे उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उनकी मौत हो गई।
डॉ. बीएन भारती और सीएचओ सुरेश कुमार की भूमिका की जांच की मांग
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताते हुए सिविल सर्जन को एक लिखित आवेदन सौंपा है। इस आवेदन में उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर बीएन भारती और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) सुरेश कुमार का विशेष रूप से उल्लेख किया है तथा उनकी भूमिका की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल में वरिष्ठ व अनुभवी डॉक्टरों की सीधी निगरानी के बजाय कथित तौर पर अनुभवहीन कर्मियों से मरीजों का इलाज कराया जा रहा था।
चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक घटना ने सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था, डॉक्टरों की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब और जरूरतमंद परिवार बेहतर इलाज की आस में सदर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन इलाज में कथित लापरवाही और ऑक्सीजन हटाने जैसे गंभीर आरोप स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। परिजनों ने मांग की है कि मरीज को दी गई दवाओं, मेडिकल रिकॉर्ड और ड्यूटी रोस्टर की गहराई से जांच हो।
सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा ने दिए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा ने बयान दिया है कि मृतका के परिजनों की ओर से उन्हें लिखित शिकायत प्राप्त हो चुकी है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अस्पताल के भीतर किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे मामले की पारदर्शी तरीके से जांच करवाई जाएगी और जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कदम पर टिकी लोगों की निगाहें
परिजनों की शिकायत और सिविल सर्जन के आश्वासन के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग इस संवेदनशील मामले में किस प्रकार की जांच कमेटी का गठन करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। बहरहाल, इस घटना के बाद से अस्पताल परिसर में तनाव और चर्चाओं का माहौल बना हुआ है, तथा पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।