वैशाली में अनोखी साधना: 35 किलो कीलों पर लेटकर तपस्या कर रही 17 वर्षीय निशा, देखने के लिए उमड़ रही भारी भीड़

वैशाली जिले के बाजितपुर चकस्तूरी गांव में एक 17 वर्षीय किशोरी नवरात्र के मौके पर 35 किलो लोहे के किलों पर लेटर मां की अराधना कर रही है। किशोरी का दावा है कि उसे मां काली ने सपने में दर्शन देकर उसकी परीक्षा लेने की बात की थी, जिसके बाद वह ऐसा कर रही.

वैशाली में अनोखी साधना: 35 किलो कीलों पर लेटकर तपस्या कर रही
वैशाली में 17 वर्षीय किशोरी की अनोखी साधना- फोटो : रिषभ कुमार

Vaishali : जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड अंतर्गत बाजितपुर चकस्तूरी गांव इन दिनों एक अनोखे धार्मिक अनुष्ठान और दावे को लेकर चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। यहाँ 17 वर्षीय किशोरी निशा कुमारी नवरात्र के पावन अवसर पर लकड़ी के प्लाई बोर्ड पर ठोकी गई करीब 35 किलोग्राम लंबी कीलों के ऊपर लेटकर कठिन साधना कर रही है। उसके सीने पर कलश रखा हुआ है और हाथ में तलवार थामे वह माँ काली के स्वरूप में नजर आ रही है। निशा की इस साहसिक और कठिन साधना को देखने के लिए न केवल स्थानीय ग्रामीण, बल्कि दूर-दराज के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।


सपने में मां काली के दर्शन और परीक्षा का दावा

निशा का दावा है कि सावन महीने के बाद उसे सपने में मां काली दिखाई दी थीं और परीक्षा लेने की बात कही गई थी, जिसके बाद उसने इस कठिन मार्ग को चुना। परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, जिस बोर्ड पर निशा लेटी है, उसमें लगभग ढाई इंच लंबी और कुल 35 किलोग्राम कीलें लगाई गई हैं, जिसे चार लोगों ने मिलकर चार दिनों में तैयार किया था। निशा का कहना है कि उसे इन कीलों पर लेटने पर किसी प्रकार का दर्द महसूस नहीं हो रहा है और उसके लिए ये कीलें फूलों जैसी हैं। हालांकि, इन दावों की कोई स्वतंत्र या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।


डेढ़ साल से खराब थी तबीयत, इलाज में खर्च हुए तीन लाख रुपये

किशोरी के पिता प्रकाश मल्लिक, जो साफ-सफाई का काम करने के साथ सूप-दौरी बुनकर अपने परिवार का गुजारा चलाते हैं, ने बताया कि उनकी बेटी की तबीयत पिछले करीब डेढ़ साल से लगातार खराब चल रही थी। उन्होंने कई जगहों पर उसका इलाज कराया, जिसमें दवाइयों और अन्य उपचार पर लगभग तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं हुआ। पिता के अनुसार, निशा बचपन से ही पूजा-पाठ में गहरी रुचि रखती थी और करीब 13 वर्ष की उम्र से ही देवी-देवताओं की आराधना में अधिक समय देने लगी थी। परिवार को बेटी की इस कठिन साधना को लेकर भय भी सता रहा है, लेकिन निशा अपनी जिद पर अडिग है।


दूर-दराज से पहुंच रहे लोग, भीड़ के कारण बढ़ रही मुश्किलें

निशा की साधना की खबर फैलते ही वहां श्रद्धालुओं का तांता लग गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उसे देखने के लिए पटना, आरा, बक्सर, पश्चिम चंपारण, भागलपुर, समस्तीपुर, कटिहार और आसनसोल जैसे दूर-दराज के स्थानों से भी लोग पहुँच रहे हैं। भारी भीड़ जुटने के कारण गाँव की संकरी सड़कों पर आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए परिजन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।


स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों की चिंता

दूसरी ओर, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में और पहले से अस्वस्थ रहने के दौरान कीलों पर लंबे समय तक लेटना तथा सीने पर भारी वजन रखना शारीरिक चोट या गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। धार्मिक आस्था और मान्यताओं के बीच किशोरी की शारीरिक सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी उतना ही आवश्यक माना जा रहा है।


रिषभ की रिपोर्ट