वैशाली के इस इलाके में गंगा नदी के कटाव से विकराल स्थिति: घर और खेत नदी में समाए, कटावरोधी कार्यों की कार्यशैली पर उठे सवाल

वैशाली जिले के महनार मेंनदी किनारे बसे दर्जनों परिवारों के घर, डेरे और मवेशियों के आशियाने गंगा में समा चुके हैं, जिससे लोगों के सामने रहने और खाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.....

वैशाली के इस इलाके में गंगा नदी के कटाव से विकराल स्थिति: घर
महनार में गंगा का कटाव हुआ विकराल- फोटो : रिषभ कुमार

Vaishali : जिले के महनार इलाके में गंगा नदी का कटाव लगातार भयावह रूप धारण करता जा रहा है। खड़गपुर बिल्ट चौक से लेकर महनार घाट तक नदी की तेज और विनाशकारी धारा लगातार उपजाऊ जमीन और रिहायशी इलाकों को अपने आगोश में ले रही है। स्थिति यह हो गई है कि नदी किनारे बसे दर्जनों परिवारों के घर, डेरे और मवेशियों के आशियाने गंगा में समा चुके हैं, जिससे लोगों के सामने रहने और खाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।


पिछले साल से जारी है तबाही, बेबस हैं ग्रामीण

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गंगा के कटाव का यह सिलसिला पिछले साल से ही लगातार जारी है। नदी की दूसरी तरफ तो कटाव पर कुछ हद तक नियंत्रण पा लिया गया, लेकिन इस क्षेत्र में तबाही थमने का नाम नहीं ले रही है। लोगों की वर्षों की मेहनत से बनाई गई आशियाने और खेती की उपजाऊ जमीनें उनकी आंखों के सामने ही नदी में विलीन हो गईं और वे पूरी तरह बेबस नजर आए।


कटावरोधी कार्यों में धांधली के गंभीर आरोप

गंगा की इस तबाही के बीच प्रशासन द्वारा किए जा रहे कटावरोधी कार्यों की कार्यशैली भी गहरे संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय ग्रामीणों ने संबंधित ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि बचाव के लिए लगाए गए पिलर, बांस के खंभे, भूसा और अन्य सामग्रियां रात के अंधेरे में चुराकर या काटकर हटाई जा रही हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि क्रेन की मदद से लगाए गए पेड़-पौधों को उखाड़कर बेचा जा रहा है और लोगों के बचे-कुचे टाटी-पलानी भी उजाड़े जा रहे हैं।


सैकड़ों परिवारों की जिंदगी दांव पर, स्थायी समाधान की मांग

इस भीषण कटाव ने नदी के किनारे रह रहे सैकड़ों परिवारों के जीवन को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया है। ग्रामीणों को इस बात का डर सता रहा है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में पूरी आबादी और बची हुई जमीन भी गंगा में समा जाएगी। प्रभावित लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि चल रहे कटावरोधी कार्यों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।


खानापूर्ति के बजाय प्रभावी और स्थायी व्यवस्था की आस

ग्रामीणों की सबसे बड़ी और मुख्य मांग यह है कि कागजी खानापूर्ति या लीपापोती करने के बजाय गंगा के कटाव को रोकने के लिए कोई ठोस, प्रभावी और स्थायी इंजीनियरिंग समाधान निकाला जाए। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों की इस गुहार और दर्द पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और इस आपदा से निपटने के लिए क्या पुख्ता कदम उठाए जाते हैं।


रिषभ की रिपोर्ट