Vaishali Boat Accident:वैशाली नाव हादसे में एक ही परिवार के 7 बच्चों समेत 13 की मौत से कोहराम, जनाक्रोश देखकर मौके से भागीं डीएम, जर्जर नाव की शिकायतों पर क्यों सोया रहा प्रशासन? सीओ पर ये आरोप भी
Vaishali Boat Accident: वैशाली जिले के राघोपुर में नाव हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी।लोगों का आक्रोश इतना तेज था कि डीएम को विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध के दौरान डीएम के खिलाफ नारेबाजी हुई और उन्हें वापस लौटना पड़ा।
Vaishali Boat Accident: वैशाली जिले के राघोपुर में नाव हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुए इस दर्दनाक हादसे में 13 बच्चों की मौत की खबर से इलाके में कोहराम मच गया। जिस गांव में खुशियों और मेल-मिलाप की बातें होनी चाहिए थीं, वहां मातम, चीख-पुकार और इंसाफ की मांग गूंजने लगी। हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत आला अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन लोगों का आक्रोश इतना तेज था कि डीएम को विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध के दौरान डीएम के खिलाफ नारेबाजी हुई और उन्हें वापस लौटना पड़ा।

जर्जर नाव को लेकर शिकायतें, फिर भी क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
ग्रामीणों के मुताबिक, बच्चे नाव से भोज खाने जा रहे थे। इसी दौरान नाव फटने से बड़ा हादसा हो गया। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतकों में एक ही परिवार के सात बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। रामप्रवेश राय उर्फ राजा के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि हादसे में शामिल नाव पुरानी और जर्जर थी। इसे बदलने के लिए कथित तौर पर कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल उठ रहा है कि अगर नाव की हालत को लेकर पहले से शिकायतें की जा रही थीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाया? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी?

अस्पताल की बदइंतजामी पर भी भड़के लोग
हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। लोगों का आरोप है कि अस्पताल में केवल एक डॉक्टर मौजूद थे और एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं होने का दावा भी किया गया। इन आरोपों ने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया।
ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि यदि समय पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा और आपातकालीन मदद मिलती, तो राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी हो सकता था। हालांकि, चिकित्सा सुविधाओं की वास्तविक स्थिति और उनकी वजह से मौतों पर पड़े असर की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सीओ पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग
गुस्साए ग्रामीणों ने संबंधित अंचलाधिकारी (सीओ) के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई। लोगों का आरोप है कि नाव बदलने की मांग पर कार्रवाई नहीं होने की जवाबदेही तय होनी चाहिए। विरोध के दौरान डीएम के खिलाफ नारेबाजी हुई और उन्हें वापस लौटना पड़ा। फिलहाल ग्रामीण शवों को उठाने देने के लिए तैयार नहीं बताए जा रहे हैं।

इस हादसे ने नाव परिचालन की सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो, शिकायतों के रिकॉर्ड खंगाले जाएं और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही साबित होती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवारों को उचित सहायता मिले और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए जर्जर नावों तथा आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था की जवाबदेही तय हो।
रिपोर्ट- ऋषभ कुमार