blinkit ambulance: दीपिंदर गोयल का ऐलान, ब्लिंकिट की इमरजेंसी एम्बुलेंस मुफ्त, नॉन-इमरजेंसी पर लगेगा चार्ज

blinkit ambulance: ब्लिंकिट एम्बुलेंस की नॉन-इमरजेंसी सेवा के लिए अब 2,500 रुपये देने होंगे। दीपिंदर गोयल ने बताया कि इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा पहले की तरह मुफ्त रहेगी।

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blinkit ambulance:  क्विक कॉमर्स कंपनी ब्लिंकिट ने अपनी एम्बुलेंस सेवा को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब इस सेवा के तहत नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए 2,500 रुपये देने होंगे। हालांकि, इमरजेंसी की स्थिति में एम्बुलेंस सेवा पहले की तरह मुफ्त रहेगी। जोमैटो और इटरनल के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को इसकी घोषणा की।


ब्लिंकिट ने कुछ समय पहले 10 मिनट में एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की सेवा शुरू की थी। इस पहल को लोगों ने काफी सराहा था। अब कंपनी ने कहा है कि इमरजेंसी एम्बुलेंस को जरूरतमंद मरीजों के लिए उपलब्ध रखने के उद्देश्य से नॉन-इमरजेंसी सेवाओं पर शुल्क लगाया जा रहा है।


सोशल मीडिया पर दीपिंदर गोयल ने दी जानकारी


दीपिंदर गोयल ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर पोस्ट साझा कर इस बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्लिंकिट एम्बुलेंस सेवा ने पिछले दो साल में करीब 42,000 मामलों में मदद की है। इनमें लगभग 20,000 इमरजेंसी मामले शामिल हैं। अब तक इस सेवा के लिए लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया गया है।


उन्होंने कहा कि कंपनी आगे भी इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा को मुफ्त रखना चाहती है। लेकिन अब नॉन-इमरजेंसी बुकिंग की संख्या बढ़ रही है। इनमें सामान्य जांच के लिए अस्पताल जाना, अस्पताल से घर लौटना या दूसरी ऐसी जरूरतें शामिल हैं, जिनके लिए निजी वाहन या कैब का इस्तेमाल किया जा सकता है।


नॉन-इमरजेंसी एम्बुलेंस के लिए देने होंगे 2,500 रुपये


दीपिंदर गोयल के मुताबिक, ऐसी हर बुकिंग के कारण पूरी तरह से तैयार एम्बुलेंस और पैरामेडिकल स्टाफ कुछ समय के लिए इमरजेंसी सेवा से हट जाते हैं। ऐसे में किसी गंभीर मरीज को जरूरत पड़ने पर एम्बुलेंस उपलब्ध कराने में परेशानी हो सकती है। इसी वजह से कंपनी ने फैसला किया है कि इमरजेंसी ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेंगे, जबकि नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए 2,500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह रकम यात्रा पूरी होने के बाद ली जाएगी। गोयल ने बताया कि यह शुल्क निजी एम्बुलेंस सेवाओं के चार्ज के आसपास है। इससे मिलने वाला पैसा इटरनल फाउंडेशन को दिया जाएगा, जो इन एम्बुलेंस का संचालन करता है। इस रकम का इस्तेमाल एम्बुलेंस सेवा को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।


इमरजेंसी मरीजों के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध रखना मकसद


दीपिंदर गोयल ने यह भी कहा कि शुल्क लागू होने के बाद नॉन-इमरजेंसी बुकिंग की संख्या कम हो सकती है। हालांकि, कंपनी का मुख्य उद्देश्य एम्बुलेंस को उन लोगों के लिए उपलब्ध रखना है, जिन्हें वास्तव में तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत है। उनके मुताबिक, ब्लिंकिट की 10 मिनट वाली एम्बुलेंस सेवा अब तक हजारों लोगों की मदद कर चुकी है। कंपनी चाहती है कि भविष्य में भी किसी गंभीर स्थिति में मरीजों को समय पर एम्बुलेंस मिल सके। इस बदलाव का मकसद सामान्य अस्पताल यात्राओं के लिए एम्बुलेंस के इस्तेमाल को कम करना और इमरजेंसी के समय उनकी उपलब्धता बनाए रखना है।