Diwali inflation: धनतेरस पर बढ़ेगा खर्च! बादाम, काजू, पिस्ता से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक के दाम बढ़े

Diwali inflation: दिवाली और धनतेरस से पहले मसाले, दाल-चावल, बादाम, काजू, पिस्ता, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे हो गए हैं। जानें कीमतें बढ़ने की वजह और घरेलू बजट पर इसका असर।

Diwali inflation

Diwali inflation: त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजार में खरीदारी बढ़ जाती है। दिवाली और धनतेरस पर लोग घर के लिए सामान, मिठाइयां, सूखे मेवे, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदते हैं। लेकिन इस बार बढ़ती कीमतों ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसालों, दाल-चावल और चीनी से लेकर काजू-बादाम तक के दाम बढ़ गए हैं। वहीं, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और धातुओं से बने बर्तन खरीदने के लिए भी पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।


खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और बर्तनों की लागत बढ़ने से त्योहारों की खरीदारी महंगी हो रही है। ऐसे में कंपनियों और दुकानदारों की ओर से मिलने वाली छूट के बावजूद ग्राहकों को अपने बजट का ध्यान रखना होगा।


चीनी, जीरा और दाल-चावल के दाम बढ़े


किराना बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। कारोबारियों के मुताबिक, करीब 20 दिन पहले चीनी का भाव 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमत घटकर 50 रुपये तक आई, लेकिन हाल के दिनों में फिर तेजी आई और भाव करीब 58 रुपये प्रति किलो हो गया। मसालों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कमजोर मानसून और पैदावार पर असर को इसकी एक वजह बताया जा रहा है। कारोबारियों के अनुसार, महज 15 दिनों में जीरा, धनिया और हल्दी के दाम करीब 15 फीसदी तक बढ़े हैं। थोक कारोबारी विशेश्वर राजदान के मुताबिक, मेथी दाना करीब 10 फीसदी महंगा हुआ है, जबकि छोले और काले चने की कीमतों में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पिछले दो महीनों में चावल के दाम भी 25 फीसदी तक बढ़ने की बात कही गई है। इससे रोजमर्रा की खरीदारी पर अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है।


एक महीने में बादाम और पिस्ता की कीमतों में उछाल


त्योहारों के दौरान सूखे मेवों की मांग बढ़ जाती है। लोग इन्हें मिठाइयों में इस्तेमाल करने के साथ उपहार के तौर पर भी देते हैं। लेकिन इस बार बादाम, काजू, पिस्ता और अखरोट की गिरी महंगी हो गई है। कारोबारियों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में बादाम करीब 900 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जिसकी कीमत अक्टूबर में बढ़कर 1,200 रुपये हो गई। काजू का भाव 1,000 से बढ़कर 1,100 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। वहीं, पिस्ता 1,200 रुपये से बढ़कर 1,800 से 1,900 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। अखरोट की गिरी की कीमत भी 1,350 रुपये से बढ़कर करीब 1,500 रुपये प्रति किलो हो गई है। इन बढ़ी हुई कीमतों का असर मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट पैक पर भी पड़ रहा है।


किराना बाजार में इन चीजों के नए भाव


कारोबारियों के बताए गए आंकड़ों के अनुसार, जीरे की कीमत 250 रुपये से बढ़कर 300 से 350 रुपये प्रति किलो हो गई है। धनिया 230 से बढ़कर 280 रुपये और हल्दी 190 से बढ़कर 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी तरह चीनी का भाव 52 रुपये से बढ़कर 58 रुपये प्रति किलो बताया गया है। चावल की कीमतें पहले 40 से 100 रुपये प्रति किलो के बीच थीं, जो अब किस्म के आधार पर 60 से 120 रुपये तक पहुंच गई हैं। अरहर दाल का भाव भी 130 रुपये से बढ़कर करीब 150 रुपये प्रति किलो हो गया है। इन कीमतों में शहर, दुकान, ब्रांड और सामान की गुणवत्ता के आधार पर अंतर हो सकता है।


ड्राई फ्रूट्स महंगे होने की क्या वजह है?


खारी बावली के थोक कारोबारी जितेंद्र मेहता के अनुसार, सूखे मेवों की घरेलू उपलब्धता पर अफगानिस्तान, ईरान और अमेरिका से होने वाले आयात का असर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति, फसल की स्थिति, रुपये और डॉलर की विनिमय दर तथा आयात और ढुलाई की लागत कीमतों को प्रभावित करती है। त्योहारों में मांग बढ़ने के साथ अगर बाजार में उपलब्ध सामान कम हो, तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। रुपये की कमजोरी और आयात में कमी भी कुछ उत्पादों को महंगा कर सकती है।


टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन भी हुए महंगे


त्योहारों में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए खास ऑफर और छूट देती हैं। लेकिन इस बार कई उत्पादों की कीमतें पहले ही बढ़ने की खबर है। लाजपत नगर के इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी राजेंद्र के मुताबिक, कंपनियों ने त्योहारों से पहले फ्रिज, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के दाम करीब 8 से 10 फीसदी तक बढ़ाए हैं। उनके अनुसार, पिछले साल के मुकाबले भी कुछ उत्पाद महंगे हैं। इसका मतलब है कि छूट मिलने के बावजूद ग्राहकों को खरीदारी के लिए ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ सकती है। टीवी, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने की योजना बना रहे परिवारों को अपने बजट के हिसाब से विकल्प चुनने होंगे।


धनतेरस पर बर्तन खरीदना भी पड़ेगा महंगा


धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन स्टील, पीतल, तांबे और एल्यूमीनियम के बर्तनों की मांग बढ़ जाती है। लेकिन धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से इस बार बर्तन खरीदने का खर्च भी बढ़ सकता है। बर्तन कारोबार से जुड़े सुरेश भाई के मुताबिक, तांबे और एल्यूमीनियम की कीमतों में करीब 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं, स्टेनलेस स्टील के दाम भी करीब 15 फीसदी बढ़ने की बात कही गई है। धातुओं की लागत बढ़ने का असर बर्तनों की कीमतों पर पड़ सकता है।


खाने की थाली पर भी महंगाई का असर


महंगाई का असर केवल बाजार से सामान खरीदने तक सीमित नहीं है। घर में बनने वाले खाने की लागत भी बढ़ रही है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में शाकाहारी थाली की लागत पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 10 फीसदी बढ़ी। वहीं, मांसाहारी थाली की लागत में 6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। त्योहारों के दौरान घरों में पकवान बनाने, मेहमानों की खातिरदारी करने और उपहार खरीदने पर खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में किराना सामान, सूखे मेवे, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती कीमतें लोगों के कुल बजट पर असर डाल सकती हैं।


इस बार त्योहारों की खरीदारी के लिए बढ़ाना होगा बजट


दिवाली और धनतेरस से पहले कई जरूरी सामान महंगे होने से लोगों को खरीदारी की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। मसालों और दाल-चावल से लेकर सूखे मेवे, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स तक की बढ़ी कीमतें घरेलू खर्च बढ़ा सकती हैं। ऐसे में खरीदारी से पहले अलग-अलग दुकानों के दाम की तुलना करना, जरूरत के हिसाब से सामान लेना और छूट की शर्तें समझना फायदेमंद हो सकता है। इससे त्योहारों की खरीदारी के दौरान बजट संभालने में मदद मिलेगी।