टेक वर्ल्ड का सबसे 'महंगा' तलाक, फाउंडर पति की चालाकी नहीं आई काम, अदालत ने ठोंका अब तक का सबसे बड़ा हर्जाना
टेक दिग्गज जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू का तलाक सुर्खियों में है। कैलिफोर्निया की अदालत ने उन्हें 1.7 अरब डॉलर (करीब 14,000 करोड़ रुपये) का बॉन्ड जमा करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है।
N4N Desk - रिश्तों की कड़वाहट जब अरबों के साम्राज्य से टकराती है, तो मंजर कितना भयानक होता है, इसका ताजा उदाहरण एक हाई-प्रोफाइल डाइवोर्स केस में देखने को मिला है। एक दिग्गज टेक फाउंडर ने अपनी पत्नी को तलाक के सेटलमेंट में हिस्सा न देने के लिए कथित तौर पर अपनी संपत्ति भाई-बहनों के नाम कर दी, लेकिन उनकी यह 'चालाकी' विदेशी अदालत में धरी की धरी रह गई। डाइवोर्स की इस कानूनी जंग में अब अदालत ने पति को हजारों करोड़ रुपये का सुरक्षा बॉन्ड जमा करने का ऐतिहासिक फरमान सुनाया है, जिसने पूरे बिजनेस जगत में खलबली मचा दी है।
तीन दशक पुराने रिश्ते का कानूनी अंत
आईआईटी-मद्रास से पढ़ाई के बाद 1989 में अमेरिका गए श्रीधर वेम्बू ने 1993 में एंटरप्रेन्योर प्रमिला श्रीनिवासन से शादी की थी। 26 साल के बेटे के माता-पिता यह दंपति करीब तीन दशकों तक कैलिफोर्निया में साथ रहे। विवाद तब शुरू हुआ जब 2019 में वेम्बू भारत लौट आए और 2021 में तलाक की याचिका दायर की। अब यह मामला संपत्ति के बंटवारे को लेकर दुनिया के सबसे महंगे तलाक केसों में से एक बन गया है।
शेयरों की हेराफेरी का गंभीर आरोप
प्रमिला श्रीनिवासन ने अदालत में सनसनीखेज आरोप लगाया है कि श्रीधर वेम्बू ने वैवाहिक संपत्ति के बंटवारे से बचने के लिए जोहो कंपनी के अधिकांश शेयर अपनी बहन राधा वेम्बू और भाई शेखर को ट्रांसफर कर दिए। वर्तमान में राधा के पास लगभग 47.8% और शेखर के पास 35.2% हिस्सेदारी है, जबकि खुद वेम्बू के पास केवल 5% शेयर बचे हैं। हालांकि, श्रीधर वेम्बू ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'मनगढ़ंत कहानी' करार दिया है।
1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड जमा करने का आदेश
जनवरी 2025 में कैलिफोर्निया की सर्वोच्च अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए श्रीधर वेम्बू को 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर (भारतीय मुद्रा में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक) का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया। अदालत का मानना है कि वैवाहिक संपत्ति पर प्रमिला श्रीनिवासन के अधिकारों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है।
गाँव से ग्लोबल कंपनी चलाने का सफर
श्रीधर वेम्बू अपनी सादगी और तमिलनाडु के मथलमपराई गांव से ग्लोबल सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो को चलाने के लिए जाने जाते हैं। 1996 में 'एडवेंटनेट' के नाम से शुरू हुई यह कंपनी 2009 में 'जोहो कॉर्पोरेशन' बनी। आज यह कंपनी अरबों डॉलर की है, लेकिन फाउंडर के निजी जीवन के इस विवाद ने टेक जगत में खलबली मचा दी है।