Bihar Crime: जीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न छात्रों की गुंडागर्दी! मरीज के परिजनों पर की लात-घूसों की बरसात, प्रशासन देखता रहा तमाशा

Bihar Crime: जीएमसीएच में फिर एक बार जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न छात्रों की गुंडागर्दी सामने आई है। इस बार अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों को जमकर पीटा गया।

Bettiah GMCH Shocked as Junior Doctors Assault Patient s Fam
जीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न छात्रों की गुंडागर्दी! - फोटो : reporter

Bettiah: प•चंपारण के बेतिया जीएमसीएच में फिर एक बार जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न छात्रों की गुंडागर्दी सामने आई है। इस बार अस्पताल में भर्ती मरीज सुशीला देवी के परिजनों को जमकर पीटा गया। जानकारी के अनुसार, मरीज के परिजन पटना से उसे बेतिया लाए थे, लेकिन रास्ते में मरीज की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर ने मरीज का ऑक्सीजन मास्क हटा दिया, जिस पर परिजनों और डॉक्टर के बीच मामूली विवाद हुआ।

लेकिन विवाद जल्दी शांत होने की बजाय बढ़ गया। दर्जनों मेडिकल इंटर्न छात्र मौके पर आ गए और मरीज के बेटे विशाल राज और उसके भाई अमन ठाकुर की लात-घूसों, जूतों से जमकर पिटाई की। वीडियो फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि अस्पताल परिसर में इंटर्न छात्रों ने गुंडों की तरह पिटाई की, और परिजन बेहाल हो गए। युवक की केवल इतनी गलती थी कि उसने डॉक्टर से सिर्फ यह पूछा था कि मां का मास्क क्यों हटाया गया।

पिता ज्ञानप्रकाश ने बताया कि उनके बेटे ने केवल यह सवाल किया, लेकिन इसके बाद उसे बेरहमी से पीटा गया। बताया जा रहा है कि मरीज की मौत हो गई, और इसी को लेकर विवाद उभरा। अस्पताल की अधीक्षक डॉक्टर सुधा भारती ने कहा कि मरीज गंभीर हालत में भर्ती थी और विवाद उसके बाद हुआ।

बेतिया जीएमसीएच में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इंटर्न छात्रों ने जीविका दीदियों और अन्य परिजनों की पिटाई की थी। कई बार प्रशासन कार्यवाही का दावा करता रहा, लेकिन मामलों को रफा-दफा करने की प्रवृत्ति जारी रही। लगातार अस्पताल परिसर में जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न छात्रों की गुंडागर्दी की घटनाएं सामने आ रही हैं।

अब सवाल यह उठता है कि क्या मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में इलाज के लिए आए तो लात-घूस खाने पड़ेंगे? और क्या प्रशासन इन गुंडों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में नाकाम है? जीएमसीएच में यह माहौल गंभीर चिंता का विषय बन चुका है, जहां सुरक्षा और मानवाधिकारों की अनदेखी से अस्पताल प्रशासन की छवि धूमिल होती जा रही है।

रिपोर्ट- आशीष कुमार