Bihar News: बिहार में दान की जमीन पर कब्जे की साज़िश, भाई बहन की जंग हुई सरेआम, खेल बड़ा है

Bihar News:जमीन को लेकर सुलग रहा विवाद अब चारदीवारी लांघकर सार्वजनिक मंच तक आ पहुंचा है।...

Bhagalpur Bid to Grab Donated Land
बिहार में दान की जमीन पर कब्जे की साज़िश- फोटो : reporter

Bihar News: भाई–बहन के रिश्ते में पड़ी दरार अब दान, दस्तावेज़ और दग़ाबाज़ी के गंभीर आरोपों में तब्दील हो चुकी है। मामला आशा सिन्हा उर्फ़ माया देवी से जुड़ा है, जिनका आरोप है कि उनके सगे भाई प्रदीप प्रकाश अपने ही पिता द्वारा दान में दी गई चार कट्ठा ज़मीन को अब दोबारा हथियाने की कोशिश कर रहे हैं।भागलपुर में एक ही परिवार के भीतर ज़मीन को लेकर सुलग रहा विवाद अब चारदीवारी लांघकर सार्वजनिक मंच तक आ पहुंचा है। 

पीड़ित पक्ष का कहना है कि वर्षों पहले उनके पिता ने विधिवत प्रक्रिया के तहत यह ज़मीन दान में दी थी, जिसके आधार पर आशा देवी का परिवार लंबे समय से उस पर क़ाबिज़ है। लेकिन अब अचानक प्रदीप प्रकाश ने उसी ज़मीन को अपनी बताते हुए फर्जी दस्तावेज़ तैयार कराने की साज़िश रच दी। आरोप है कि इस पूरे खेल में बहन आशा देवी, उनके पति सीताराम सिंह और भांजा सुमित कुमार को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है।

मामला तब और संगीन हो गया जब शनिवार दोपहर 12 बजे पीड़ित परिवार प्रेस के सामने आया। आशा देवी के साथ उनके पति और पुत्र सुमित कुमार भी मौजूद रहे। सुमित कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि यह ज़मीन उनके नाना द्वारा दान की गई थी और उसी वैध दानपत्र के आधार पर उनका परिवार वहां रह रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फर्जी काग़ज़ात के ज़रिये ज़मीन हड़पने की साज़िश रची जा रही है और उन्हें बेवजह कानूनी पचड़ों में उलझाने की तैयारी है।

विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब पीड़ित परिवार के एक मित्र ने स्थानीय सरपंच प्रतिनिधि पर भी प्रदीप प्रकाश का साथ देने का आरोप जड़ दिया। हालांकि सरपंच प्रतिनिधि ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत या पुराना मामला है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि बेगुनाहों को फंसाना न तो इंसाफ़ है और न ही समाज के हित में।

यह मामला अब सिर्फ भाई–बहन के बीच का घरेलू झगड़ा नहीं रहा, बल्कि यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या दान में दी गई संपत्ति को बाद में छीना जा सकता है? क्या पारिवारिक रिश्तों की आड़ में फर्जीवाड़ा किया जा सकता है? और क्या प्रशासन ऐसे मामलों में निष्पक्ष भूमिका निभाएगा? अब निगाहें प्रशासन और राजस्व विभाग पर टिकी हैं क्या सच सामने आएगा या साज़िश का खेल यूं ही चलता रहेगा।

बालमुकुंद शर्मा की रिपोर्ट