Bihar Police Raj:बिहार में थाना राज के कारण गृह मंत्री के एक्टिव मोड पर सवाल, विधायक के सामने फूटा पीड़िता का दर्द, लीपापोती जारी

एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।विधायक जब एक महिला कविता देवी का मामला लेकर थाने पहुंचे, तो वहां जो खुलासा हुआ, वह चौंकाने वाला था।

Bhagalpur Police Raj Raises Questions on Home Minister s Act
बिहार में थाना राज के कारण गृह मंत्री के एक्टिव मोड पर सवाल- फोटो : reporter

Bihar Police Raj: बिहार में जब से गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने गृह विभाग की कमान संभाली है, तब से पुलिस प्रशासन को ‘एक्टिव मोड’ में बताया जा रहा है। वरीय अधिकारी अब काग़ज़ी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि क्षेत्रीय थानों में पहुंचकर जनता दरबार लगाते हैं, लोगों की व्यथा सुनते हैं और मौके पर समाधान का भरोसा दिलाते हैं। यह बदलाव जनता के बीच एक नई उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। पहले जहां फरियाद जिला मुख्यालयों तक सिमट कर रह जाती थी, वहीं अब थाने की चौखट पर ही इंसाफ़ की बात हो रही है।

लेकिन इसी बदले हुए सिस्टम के बीच भागलपुर ज़िले के पीरपैंती थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीरपैंती की विधायक मुरारी पासवान जब एक महिला कविता देवी का मामला लेकर थाने पहुंचे, तो वहां जो खुलासा हुआ, वह चौंकाने वाला था। महिला ने विधायक के सामने अपनी पीड़ा बयान करते हुए कहा कि पड़ोसी से विवाद के बाद दोनों पक्षों की ओर से पीरपैंती थाने में मामला दर्ज हुआ था, जबकि विवाद के समय उनके पति मुंबई में काम कर रहे थे और ससुर जेल में बंद थे।

पीड़िता का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने केस में उनके पति का नाम जोड़ दिया। इतना ही नहीं, महिला ने यह भी दावा किया कि जब घर में पुरुष सदस्य मौजूद नहीं थे, तब मध्य रात्रि में घर में घुसकर सोते समय कंबल उठाकर देखा गया। यह आरोप न केवल पुलिसिया रवैये पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि महिला सुरक्षा के दावों की भी पोल खोलता है।

मामला यहीं नहीं रुका। महिला का कहना है कि केस से नाम कटवाने के एवज में जांच अधिकारी आरएन सिंह को एक हजार रुपये भी दिए गए। पुलिसिया दबाव और कथित लेन-देन से परेशान होकर महिला ने आखिरकार विधायक मुरारी पासवान की शरण ली। विधायक ने बिना देर किए पीरपैंती थाना पहुंचकर थानाध्यक्ष नीरज कुमार से इस पूरे मामले की शिकायत की और महिला को तत्काल पैसे वापस कराने की बात कही।

इस पर थाना प्रभारी नीरज कुमार ने निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। अब सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल एक अपवाद है या फिर थानों में अब भी पुरानी कार्यशैली ज़िंदा है। गृह मंत्री के ‘एक्टिव मोड’ में भी अगर ऐसी शिकायतें सामने आती हैं, तो यह पुलिस सुधार की राह में एक बड़ा इम्तिहान है। जनता अब सिर्फ़ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है।

रिपोर्ट- बालमुकुंद शर्मा