Bihar Crime: एर्नाकुलम एक्सप्रेस में दिव्यांग के साथ मारपीट,छीना-झपटी का खौफनाक खेल, किन्नर गिरफ्तार ,रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा पर उट रहे हैं सवाल

Bihar Crime: एर्नाकुलम-पटना एक्सप्रेस में भी यही नंगा नाच हुआ। एक दिव्यांग भाई, जो अपने छोटे बेटे और भतीजे के साथ सफर कर रहे थे, वो भी क्या जाने कि ट्रेन में बैठे-बैठे उनकी जिंदगी लूट का सामान बन जाएगी

Handicapped man assaulted snatched in Ernakulam Express
एर्नाकुलम एक्सप्रेस में दिव्यांग के साथ मारपीट- फोटो : reporter

Bihar Crime:ट्रेन का डिब्बा हो या रेल का प्लेटफॉर्म, कुछ लोग इसे अपना खुला मार्केट समझ बैठते हैं। एर्नाकुलम-पटना एक्सप्रेस में भी यही नंगा नाच हुआ। एक दिव्यांग भाई, जो अपने छोटे बेटे और भतीजे के साथ सफर कर रहे थे, वो भी क्या जाने कि ट्रेन में बैठे-बैठे उनकी जिंदगी लूट का सामान बन जाएगी।दो किन्नरों ने पहले तो तंज कसे, गालियां बकीं, फिर बात हाथापाई तक पहुंच गई। दिव्यांग यात्री ने विरोध किया तो दोनों ने मिलकर उन पर ऐसा झपट्टा मारा कि आसपास के यात्री भी देखते रह गए। 

मारपीट के बीच एक ने झट से जेब पर हाथ डाला और 3000 रुपए की नकदी उड़ा ली। पूरा माजरा इतना तेज हुआ कि पीड़ित के पास चीखने-चिल्लाने का भी मौका नहीं मिला। बेटा और भतीजा डर के मारे सिमट गए।घटना के बाद दिव्यांग यात्री ने जैसे-तैसे हिम्मत जुटाई और आरा जीआरपी में लिखित शिकायत ठोक दी। शिकायत में साफ लिखा  “दो किन्नरों ने ट्रेन में मेरे साथ मारपीट की, गंदी-गंदी गालियां दीं और 3000 रुपए छीन लिए।” 

जीआरपी के थानाध्यक्ष ने मामला गंभीर मानते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज की और फटाफट छापेमारी शुरू कर दी।इसी बीच खुफिया सूचना के आधार पर पटना जिले के जक्कनपुर थाना क्षेत्र, मीठापुर सब्जी मंडी की रहने वाली किन्नर लवली को पुलिस ने धर दबोचा। 

पूछताछ में लवली ने शुरुआत में सब कुछ टालने की कोशिश की, मगर सबूतों के आगे घुटने टेक दिए। उसका साथी अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।रेल पुलिस का कहना है कि ट्रेनों में ऐसे मार्केट चलाने वालों पर अब सख्ती बरती जाएगी। दिव्यांग यात्री के साथ ऐसा सलूक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

लवली को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और बाकी साथी को भी जल्द ही सलाखों के पीछे पहुंचाने का वादा किया गया है।ट्रेन में सफर अब सिर्फ सफर नहीं, कई बार जिंदगी-मौत का खेल बन जाता है। 

सवाल ये है कि  क्या रेलवे अपने यात्रियों को असली सुरक्षा दे पाएगा, या फिर ऐसे ‘मार्केट’ चलते रहेंगे?

रिपोर्ट- आशीष कुमार