Bihar crime: डिजिटल अरेस्ट का नया शिकार बनने से बचे बिहार के डिप्टी सीएम, साइबर अपराधियों ने पार्सल के नाम पर किया फोन
Bihar Crime: बिहार में साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे आम लोगों के साथ-साथ सूबे के वीवीआईपी को भी अपना निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं। ताजा मामला बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव से जुड़ा है, जिन्हें साइबर ठगों ने अपने झांसे में लेने की कोशिश की। अपराधियों ने डिप्टी सीएम को फोन कर उनके पार्सल में गैरकानूनी सामान होने का डर दिखाया और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' करने का प्रयास किया। हालांकि, ठग अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके।
आमतौर पर साइबर अपराधी आम नागरिकों को फोन कर दावा करते हैं कि उनके नाम से आए पार्सल में ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट या कोई अन्य संदिग्ध सामान मिला है। इसके बाद वे खुद को पुलिस या सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर करते हैं, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। इस बार अपराधियों ने यही हथकंडा डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव के खिलाफ अपनाया। फोन पर उन्हें डराने और झांसे में लेने की पूरी कोशिश की गई।
डिप्टी सीएम को निशाना बनाने की इस गंभीर कोशिश के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री के आप्त सचिव (पर्सनल सेक्रेटरी) ने तुरंत एक्शन लिया और पटना के साइबर क्राइम थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
बिहार पुलिस और साइबर सेल ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जिस नंबर से डिप्टी सीएम को फोन किया गया था, उसे ट्रेस किया जा रहा है और अपराधियों के सिंडिकेट का पता लगाने के लिए छानबीन तेज कर दी गई है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर ठगी का जाल कितना बड़ा हो चुका है और इससे बचने के लिए हर स्तर पर सतर्कता बेहद जरूरी है।