Bihar Crime: हद है! एक साथ गांव के सारे सवर्णों पर SC ST एक्ट में मुकदमा हुआ दर्ज! किसी को नहीं छोड़ा..

Bihar Crime: बिहार से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून, राजनीति और जाति तीनों को एक ही चौखटे में खड़ा कर दिया है।

 Darbhanga Entire village booked under SC ST Act in Bihar sp
एक साथ गांव के सारे सवर्णों पर SC ST एक्ट में मुकदमा हुआ दर्ज!- फोटो : reporter

Bihar Crime: बिहार से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून, राजनीति और जाति तीनों को एक ही चौखटे में खड़ा कर दिया है। दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में पैसे के लेनदेन और जमीनी विवाद से शुरू हुई अदावत अब सामूहिक अपराध और सामूहिक अभियोजन के अजीबोगरीब मुकाम पर पहुंच गई है। मामला इतना अनोखा है कि एफआईआर में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे गांव के ब्राह्मण समाज को ही अभियुक्त बना दिया गया है। सवाल यह नहीं कि झगड़ा हुआ या नहीं, सवाल यह है कि क्या कानून अब गांव और जाति के नाम पर थोक में चलने लगा है?

घटना 31 जनवरी 2026 की रात की बताई जा रही है, जब पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद इतना भड़का कि लाठी-डंडे और पगारिया निकल आए। नतीज दस से अधिक लोग घायल, महिलाएं और एक बच्ची तक जख्मी। पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी। थाना में दर्ज आवेदन में असर्फी पासवान ने करीब 70 ब्राह्मणों को नामजद और 100–150 अज्ञात लोगों को अभियुक्त बना दिया। यानी आरोप ऐसा कि पूरा गांव ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया।

बिरौल डीएसपी प्रभाकर तिवारी इसे साफ तौर पर पैसे के लेनदेन का मामला बता रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह भी है कि इस केस में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ दी गई हैं। यहीं से राजनीति की बिसात बिछती दिख रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या आर्थिक विवाद को जातीय रंग देकर कानून को सियासी हथियार बनाया जा रहा है, या फिर यह सच में सामाजिक उत्पीड़न का मामला है?

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित विक्रम पासवान के भाई कैलाश पासवान ने वर्ष 2015 में हेमंत झा का मकान निर्माण कराया था, जिसके एवज में ढाई लाख रुपये अब भी बकाया बताए जा रहे हैं। बार-बार तकाजे के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। आरोप है कि इसी रंजिश में हेमंत झा समेत कई लोग एकजुट होकर पीड़ित के घर में घुसे और हमला किया। इस पूरी वारदात का वीडियो भी वायरल है, जिसमें अफरा-तफरी और मारपीट साफ नजर आती है।

अब इस पूरे प्रकरण ने नया मोड़ तब ले लिया, जब पुलिस पर भी एक व्यवसायी ने गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाकर एसएसपी से शिकायत कर दी। यानी एक तरफ पीड़ित, दूसरी तरफ आरोपी, और तीसरी तरफ सवालों के घेरे में खड़ी पुलिस। गांव में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन काबू में बताए जा रहे हैं।

दरअसल, यह मामला सिर्फ मारपीट या पैसे का नहीं रहा। यह उस सियासी और सामाजिक सच्चाई का आईना बन गया है, जहां एक झगड़ा पूरे समुदाय पर भारी पड़ सकता है। कानून का तराजू अगर जाति के वजन से झुकने लगे, तो सवाल उठना लाज़मी है इंसाफ व्यक्तिगत होगा या सामूहिक सजा का नया अध्याय लिखा जाएगा?

रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर