Bihar NIA Raids: बिहार में में NIA की बड़ी कार्रवाई, तीन जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, जाली नोट व दोहरी नागरिकता कनेक्शन की जांच तेज

एनआईए चुप है, लेकिन आज की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि जाली नोट और हवाला रैकेट की जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं, और एजेंसी अब इसे उखाड़ने के मूड में है।

Bihar  NIA Raids: बिहार में  में NIA की बड़ी कार्रवाई, तीन जग
: बिहार में में NIA की बड़ी कार्रवाई,- फोटो : reporter

Bihar NIA Raid: रविवार  की सुबह जैसे ही सूरज निकला, उसी समय नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी  ने जिले की सियासत और अपराध जगत में हलचल मचा दी। मोतिहारी के चकिया कोइलवा बेलवा से लेकर आदापुर थाना क्षेत्र तक, एक साथ कई जगहों पर एनआईए की दबिश से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जाली नोट, हवाला नेटवर्क और दोहरी नागरिकता के शक़ को लेकर की जा रही है। अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से साफ परहेज़ कर रहे हैं, मगर छापेमारी की तसल्ली से साफ है कि मामला बेहद संगीन है।

सबसे बड़ी कार्रवाई चकिया थाना क्षेत्र के कोयला बेलवा गांव में हुई, जहां एनआईए की टीम ने शिक्षक मनोज पाठक के घर पर तड़के से ही छापा मारना शुरू कर दिया। करीब तीन घंटे तक चली इस कार्रवाई में एजेंसी के साथ कई थानों की पुलिस भी शामिल रही। टीम ने मनोज पाठक के घर के भीतर से लेकर बाहर तक हर दस्तावेज़, फाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को खंगाला। बताया जाता है कि घर में मिले कई संदिग्ध कागजात, मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को एक काले बैग में सील कर जब्त किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, बरामद कागजातों में जली हुई नोटों की गड्डियाँ, संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड और दोहरी नागरिकता से जुड़े दस्तावेज़ भी मिलने की चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एनआईए की विशेष टीम जिस तरह से हर कागज को बारीकी से स्कैन कर रही है, उससे मामले की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

मनोज पाठक को हिरासत में लेकर थाने में गहन पूछताछ की जा रही है। इसी बीच, आदापुर थाना क्षेत्र के दो ठिकानों पर भी NIA की छापेमारी की खबर से इलाके में खौफ़ और उत्सुकता दोनों माहौल गर्म किए हुए हैं। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि कहीं यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं।

फिलहाल एनआईए चुप है, लेकिन मोतीहारी में आज की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि जाली नोट और हवाला रैकेट की जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं, और एजेंसी अब इसे उखाड़ने के मूड में है।

     रिपोर्ट- हिमांशु कुमार