Bihar Crime: बिहार में गरीबों के निवाले पर डाका,TPDS गोदाम के चेकिंग से खुली पोल, वेंडर से लेकर अधिकारी तक की मिलीभगत का हुआ खुलासा

Bihar Crime:बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है।...

Motihari Raid on Poor TPDS Warehouse
बिहार में गरीबों के निवाले पर डाका- फोटो : reporter

Bihar Crime: सार्वजनिक वितरण प्रणाली  में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है।मोतीहारी के पकड़ीदयाल, मधुबन और पताही अनुमंडल के गोदामों से गरीबों के राशन में लगातार कमी हो रही है। गोदाम वेंडरों और अधिकारियों की मिलीभगत से 50 किलो 600 ग्राम के बोरों में केवल 43 से 48 किलो अनाज दिया जा रहा है। इस कमी का सीधा असर अंततः लाभार्थियों पर पड़ता है।

सूत्रों की मानें तो अधिकारियों और गोदाम प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखकर डीलरों को कम राशन देने की अनुमति दी है। शिकायत करने वाले डीलरों को जांच के नाम पर धमकाया जाता है। इस खेल में गोदाम वेंडर भी शामिल हैं, जो लाभार्थियों को मिलने वाले अनाज को घटाकर अपने हिसाब से वितरित करते हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मोतीहारी के डीएम सौरभ जोरवाल ने कड़ी कार्रवाई की। उन्होंने जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम को निर्देशित किया कि पकड़ीदयाल सहित सभी TPDS गोदामों का निरीक्षण किया जाए और कम राशन देने वाले डीलरों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। डीएम की कार्रवाई के बाद गोदाम वेंडरों और पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

सौरभ जोरवाल ने अपने पत्र में लिखा कि पकड़ीदयाल अनुमंडल के गोदामों से विक्रेताओं को भेजा जाने वाला चावल निर्धारित वजन (50.5 किलो) के बजाय 43 से 48 किलो ही मिलता है। खाली बोरे का वजन (लगभग 600 ग्राम) भी घटाया नहीं जाता। इस कमी के कारण विक्रेताओं को अपने भंडार का सही प्रबंधन करने में समस्या आती है और अंततः गरीबों को भी नुकसान उठाना पड़ता है।

पिछले कुछ समय से मोतीहारी के अलावा अन्य अनुमंडलों से भी इसी तरह की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि यह अधिकारियों की लापरवाही और निगरानी की कमी का परिणाम है। उन्होंने निर्देश दिया है कि दोषी पदाधिकारी, कर्मी या परिवहन अभिकर्ता के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए और कार्रवाई की रिपोर्ट अधोहस्ताक्षरी को अवगत कराई जाए।

कुल मिलाकर, मोतीहारी का यह मामला TPDS में भ्रष्टाचार और अनियमितता का गंभीर संकेत है, जिसमें गरीबों के निवाले पर सीधे संकट मंडरा रहा है और प्रशासन को इसके खिलाफ सख्त कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार