Bihar Police: कानून की कुर्सी पर बैठे जुर्म के सिंडिकेट का उलटा पड़ा दाव! डीएसपी और थानेदार को कोर्ट का आदेश नहीं मानना पड़ा महंगा, जब्त स्कॉर्पियो की नीलामी पड़ी भारी, विभाग में हड़कंप

Bihar Police: बिहार में कानून के रखवाले ही जब कानून को कठघरे में खड़ा कर दें, तो जुर्म की तस्वीर और भी संगीन हो जाती है।...

Lawmen in the Dock Ignoring Court Order Costs DSP SHO Dear
कानून की कुर्सी पर बैठे जुर्म के सिंडिकेट का उलटा पड़ा दाव! - फोटो : social Media

Bihar Police: बिहार में कानून के रखवाले ही जब कानून को कठघरे में खड़ा कर दें, तो जुर्म की तस्वीर और भी संगीन हो जाती है। मुजफ्फरपुर जिले में ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आर्थिक अपराध इकाई  ने तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, डीएसपी, थानाध्यक्ष और एक दारोगा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर हुई है, जिसने पूरे मामले को आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की साजिश करार दिया है।

एफआईआर के मुताबिक, मुजफ्फरपुर के मुशहरी निवासी सुशील कुमार सिंह की स्कॉर्पियो कार वर्ष 2020 में सकरा थाने द्वारा जब्त की गई थी। गाड़ी से पांच बोतल विदेशी शराब की बरामदगी दिखाई गई और मामला दर्ज कर लिया गया। बाद में पीड़ित को अदालत से राहत मिली और वह केस से बरी हो गया। इसके बाद उसने विशेष न्यायालय में गाड़ी मुक्त कराने की अर्जी लगाई। कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए सकरा थाना प्रभारी को स्कॉर्पियो रिलीज करने का हुक्म दिया, लेकिन यहां से शुरू हुआ कानून के साथ ‘खेल’।

थाना प्रभारी ने आदेश को ठंडे बस्ते में डालते हुए पीड़ित को डीएसपी पूर्वी मुजफ्फरपुर के पास भेज दिया। डीएसपी साहब ने भी फाइल घुमाने और वक्त टालने की वही पुरानी चाल चली। इंसाफ की आस में पीड़ित ने दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने थानाध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, तो महीनों बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ मार्च 2023 में स्कॉर्पियो को राज्यसात कर नीलाम कर दिया गया।

यह खुलासा किसी बम से कम नहीं था। पीड़ित ने हाईकोर्ट के निर्देश पर उत्पाद विभाग में अपील और रिवीजन याचिकाएं दाखिल कीं, लेकिन वहां भी उसे इंसाफ नहीं मिला और दोनों अर्जियां खारिज कर दी गईं। आखिरकार मजबूर होकर उसने हाईकोर्ट में दोबारा सीडब्लूजेसी दाखिल की।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को अदालत की अवहेलना, सरकारी ताकत के दुरुपयोग और सोची-समझी साजिश बताया। अदालत ने आर्थिक अपराध इकाई को आदेश दिया कि इस ‘कानूनी जुर्म’ की परतें खोली जाएं। अब ईओयू की एफआईआर के बाद कानून के इन कथित मुजरिम अफसरों पर शिकंजा कस गया है और यह तय होगा कि वर्दी की आड़ में रची गई इस साजिश का अंजाम क्या होगा।