Bihar Crime: शराबबंदी के राज में बोतल और नेमप्लेट का नंगा नाच, सरकार की गाड़ी, साहब का बेटा और रसूख का रौब, वायरल वीडियो से प्रशासन में हड़कंप

Bihar Crime: बिहार में पूर्ण शराबबंदी है साहब। सरकार दावा करती है कि शराब के खिलाफ प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में यहां तो उल्टी गंगा बहती दिख रही है।...

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शराबबंदी के राज में बोतल और नेमप्लेट का नंगा नाच- फोटो : reporter

Bihar Crime: बिहार में पूर्ण शराबबंदी है साहब। सरकार दावा करती है कि शराब के खिलाफ प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में यहां तो उल्टी गंगा बहती दिख रही है। मुजफ्फरपुर से वायरल एक वीडियो और कुछ तस्वीरों ने इस दावे की पोल खोलकर रख दी है। सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहे वीडियो में एक युवक को सरकारी स्कॉर्पियो में खुलेआम शराब की बोतल के साथ रसूख दिखाते देखा जा रहा है।

सबसे दिलचस्प या कहें शर्मनाक बात यह है कि जिस गाड़ी में शराबबंदी का मज़ाक उड़ाया जा रहा है, उस पर बड़े ठाठ से लिखा है “चेयरमैन, तिमुल, बिहार सरकार”। नेमप्लेट मानो खुद एलान कर रही हो कि यह मामला सिर्फ कानून तोड़ने का नहीं, बल्कि दबदबे, दुरुपयोग और दोहरे मापदंड का है।

गाड़ी सरकारी, रुतबा सरकारी लेकिन सवाल वही पुराना है सवारी किसकी है? मुजफ्फरपुर में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि वायरल वीडियो में दिख रहा युवक तिमुल अध्यक्ष का पुत्र बताया जा रहा है। अगर यह सच है, तो फिर मामला शराबबंदी के उल्लंघन से कहीं आगे जाकर सरकारी संपत्ति को निजी शौक में बदल देने का बन जाता है। आम आदमी के लिए जहां शराब की एक घूंट पर जेल, वहीं “साहबों” के कुनबे के लिए बोतल के साथ सरकारी स्कॉर्पियो यही है कानून का नया मॉडल?

वीडियो सामने आते ही स्थानीय प्रशासन की नींद टूटी। मुजफ्फरपुर पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं। अब यह पता लगाने की कवायद चल रही है कि स्कॉर्पियो किसके नाम आवंटित है, किस मकसद से दी गई थी और किस हालात में वह सड़क पर रसूख का तमाशा बन गई। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अगर सरकारी वाहन के दुरुपयोग और शराबबंदी उल्लंघन की पुष्टि हुई, तो कानूनी शिकंजा कसना तय है चाहे नेमप्लेट कितनी ही भारी क्यों न हो।

हालांकि वायरल वीडियो और तस्वीरों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। न्यूज4नेशन भी वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन सोशल मीडिया की अदालत में फैसला लगभग सुनाया जा चुका है। लोग पूछ रहे हैं क्या सरकारी गाड़ियां अब वंशानुगत सुविधा बन गई हैं? क्या शराबबंदी सिर्फ आम जनता के लिए है और साहबों के घर वालों के लिए फ्री पास?

प्रशासन कह रहा है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पर कार्रवाई होगी। मगर शहर की गलियों में चर्चा कुछ और ही कहती है यह मामला सिर्फ एक बोतल या एक गाड़ी का नहीं, बल्कि उस सोच का है जिसमें सरकारी कानून और संसाधन को निजी जागीर समझ लिया जाता है।

अब देखना यह है कि जांच के बाद कानून बोलेगा, या फिर यह फाइल भी रसूख की अलमारी में बंद होकर रह जाएगी। फिलहाल, मुजफ्फरपुर में सवाल सड़क पर हैं और जवाब प्रशासन के पाले में।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा